NHRC सख्त: शिमला नर्सिंग हॉस्टल में 19 छात्राओं को TB और देवघर रिमांड होम में मौत पर मुख्य सचिवों को नोटिस

Himachal News: शिमला के एमजीएमएससी (MGMSC) नर्सिंग कॉलेज हॉस्टल में 19 छात्राओं के तपेदिक यानी टीबी (Tuberculosis) से संक्रमित होने के बाद हड़कंप मच गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस थमाया है। आयोग ने प्रशासन की लापरवाही और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चिंता जताई है। सरकार से दो सप्ताह के भीतर इस गंभीर मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

हॉस्टल में मिलीं स्वच्छता और प्रबंधन की भारी कमियां

NHRC ने अपनी जांच और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर पाया कि हॉस्टल परिसर में स्वच्छता की भारी कमी है। वहां छात्राओं को अत्यधिक भीड़भाड़, सीलन भरे कमरों और अस्वच्छ परिस्थितियों में रहने को मजबूर किया गया। आयोग ने बताया कि मार्च और अप्रैल 2026 में हुए दो निरीक्षणों के बावजूद प्रशासन ने कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। इसी लापरवाही के कारण छात्राओं में टीबी का संक्रमण तेजी से फैला, जो स्वास्थ्य अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

बीमारी में काम का दबाव और खराब भोजन

आयोग ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है। खाने में बुनियादी पोषण की भारी कमी पाई गई है। इतना ही नहीं, बीमार छात्राओं को पर्याप्त आराम भी नहीं दिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, छुट्टियों के दौरान भी छात्राओं को अस्पताल में कर्मचारी के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। प्रशासन का यह अमानवीय व्यवहार छात्राओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

देवघर रिमांड होम में युवती की मौत पर झारखंड सरकार से जवाब तलब

हिमाचल के अलावा आयोग ने झारखंड के देवघर स्थित रिमांड होम में हुई एक 19 वर्षीय युवती की मौत का भी संज्ञान लिया है। NHRC ने झारखंड के मुख्य सचिव और देवघर पुलिस अधीक्षक से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। युवती की मौत 2 मई 2026 को इलाज के दौरान हुई थी। आयोग ने चिंता जताई कि इस रिमांड होम में इस साल अब तक पांच कैदियों की मौत हो चुकी है, जो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा पर उठते सवाल

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 4 मई 2026 की मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए देवघर प्रशासन की खिंचाई की है। रिपोर्टों के अनुसार, युवती की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन मौत का कारण अब तक स्पष्ट नहीं है। आयोग का मानना है कि यदि खबरें सच हैं, तो यह जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। लगातार हो रही मौतें रिमांड होम के प्रबंधन और कैदियों की स्वास्थ्य सुरक्षा में बड़ी सेंध की ओर इशारा करती हैं।

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