New Delhi News: पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और पीएमके नेता डॉ. अंबुमणि रामदास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अहम पत्र लिखा है। इस भावुक पत्र में उन्होंने भारत को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए कड़े कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि एक जनवरी 2009 या उसके बाद पैदा हुए युवाओं पर सिगरेट की बिक्री और सेवन पर पूर्ण कानूनी प्रतिबंध लगाया जाए। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में एक पूरी तरह से धूम्रपान मुक्त पीढ़ी का निर्माण करना है।
भारत में मंडरा रहा है गहरा स्वास्थ्य संकट
डॉ. रामदास ने अपने पत्र में देश के बढ़ते स्वास्थ्य संकट पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य आंकड़ों का हवाला दिया है। उनके अनुसार वर्तमान में लगभग 26.7 करोड़ भारतीय तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं। तंबाकू के सीधे सेवन से हर साल करीब 13.5 लाख लोगों की जान जाती है। इसके अलावा सेकंड-हैंड स्मोक यानी दूसरों के छोड़े गए धुएं की चपेट में आने से लगभग 23 लाख लोग असमय ही अपनी जान गंवा देते हैं।
कैंसर के बढ़ते मामलों का सबसे बड़ा कारण
भारत में कैंसर के तेजी से बढ़ते मामलों के पीछे तंबाकू बड़ी वजह है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने चेतावनी दी है कि देश में कैंसर के 40 से 50 प्रतिशत मामलों के लिए तंबाकू जिम्मेदार है। डॉ. रामदास का स्वास्थ्य सुधारों में बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने साल 2004 से 2009 के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकने का ऐतिहासिक नियम लागू किया था। अब वह तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण के लिए एक और कड़ा और स्थायी कानून चाहते हैं।
ब्रिटेन की तर्ज पर सख्त कानून बनाने की मांग
डॉ. रामदास ने केंद्र सरकार से ब्रिटेन जैसा सख्त और परिवर्तनकारी कानून बनाने का आग्रह किया है। ब्रिटेन ने युवा पीढ़ी को तंबाकू से बचाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। रामदास चाहते हैं कि भारत भी 2009 या उसके बाद जन्मे लोगों के लिए तंबाकू की बिक्री हमेशा के लिए रोके। इस तरह के पीढ़ीगत प्रतिबंध से भारत में तंबाकू का उपयोग धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा। यह फैसला लाखों परिवारों को बर्बाद होने से बचाने के लिए बहुत जरूरी है।
तंबाकू नियंत्रण से जुड़े अहम आंकड़े और तथ्य
तंबाकू नियंत्रण को लेकर डॉ. रामदास की यह मांग स्वास्थ्य क्षेत्र में गेम चेंजर साबित हो सकती है। सरकार को इन गंभीर आंकड़ों पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है:
- 2009 के बाद जन्मे युवाओं पर बैन से बदलाव आएगा।
- वर्तमान में करीब 26.7 करोड़ लोग तंबाकू का शिकार हैं।
- कैंसर के लगभग आधे मामले सीधे तौर पर तंबाकू से जुड़े हैं।
- जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए कड़े नियम वक्त की मांग हैं।


