Delhi News: कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है। इस बड़े उछाल के बाद केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। घरेलू और कमर्शियल गैस के दामों में भारी अंतर आ गया है। इस कारण सब्सिडी वाले सिलेंडर की कालाबाजारी का खतरा काफी बढ़ गया है। इसे तुरंत रोकने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। सभी सरकारी तेल कंपनियों और राज्य सरकारों को लगातार छापेमारी अभियान चलाने के स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं।
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ महंगा
सरकारी तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम अचानक बहुत बढ़ा दिए हैं। 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में सीधे 993 रुपये का भारी उछाल आया है। राजधानी दिल्ली में यह सिलेंडर अब 3,071.50 रुपये का हो गया है। पहले इसकी कीमत सिर्फ 2,078.50 रुपये थी। यह आज तक की सबसे बड़ी एकमुश्त बढ़ोतरी मानी जा रही है। इसका सीधा असर होटल कारोबारियों पर पड़ेगा। आम घरों की गैस नहीं बढ़ी है।
छोटे सिलेंडरों की कीमत में भी उछाल
कमर्शियल गैस के साथ पांच किलो वाले छोटे एफटीएल सिलेंडर भी महंगे हो गए हैं। इनकी कीमत में 261 रुपये का सीधा इजाफा किया गया है। इन सिलेंडरों का उपयोग अक्सर मजदूर और छात्र करते हैं। इससे पहले अप्रैल में 195.50 रुपये और मार्च में 114.50 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाए गए थे। तीन महीनों के भीतर कमर्शियल सिलेंडर की कुल बढ़ोतरी 1,303 रुपये तक पहुंच गई है। पेट्रोल और डीजल स्थिर हैं।
कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार का एक्शन
गैस कीमतों में उछाल के बाद घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के बीच करीब दो हजार रुपये का बड़ा अंतर आ गया है। सब्सिडी वाली गैस की कालाबाजारी का खतरा काफी बढ़ गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने तेल कंपनियों और राज्य सचिवों के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में जमाखोरी रोकने के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया गया है। राज्यों को तुरंत सख्त एक्शन लेने के निर्देश मिले हैं।
देश भर में छापेमारी और जुर्माना
एलपीजी की जमाखोरी रोकने के लिए पूरे देश में व्यापक छापेमारी अभियान तेजी से चल रहा है। तेल कंपनियों ने गैस एजेंसियों पर औचक निरीक्षण बढ़ा दिए हैं। हाल ही में 29 अप्रैल को देश में 2,300 से अधिक जगह छापेमारी की गई। अब तक कुल 336 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ ही 72 एजेंसियों को सस्पेंड कर दिया गया है। 29 अप्रैल 2026 को 50 डिस्ट्रीब्यूटर्स को नोटिस और 11 पर जुर्माना लगा।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सख्त निगरानी
पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों से आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखने की अपील की है। सरकार का मानना है कि घरेलू सब्सिडी वाले सिलेंडरों का किसी भी सूरत में दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। राज्य सरकारें आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2000 के तहत सीधी कार्रवाई कर सकती हैं। स्थानीय प्रशासन को गैस जमाखोरों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाने के पूरे अधिकार सौंपे गए हैं।


