Delhi News: दिल्ली हाई कोर्ट ने शिक्षा और बच्चों के भविष्य से जुड़े एक गंभीर मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के ढुलमुल रवैये पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने स्कूल के संचालन और निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर संबंधित विभागों को कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है।
2 साल बीतने पर भी नहीं हुई कोई ठोस प्रगति
अदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त लहजे में कहा कि 8 अप्रैल 2024 को इस संबंध में आदेश पारित किया गया था, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी जमीन पर कोई ठोस काम नहीं हुआ है। याचिका ‘सोशल ज्यूरिस्ट’ नामक संगठन द्वारा दायर की गई थी। कोर्ट को अवगत कराया गया कि एनटीपीसी लिमिटेड द्वारा मार्च 2025 तक स्कूल को फंड दिया गया था। फिलहाल केवीएस किसी तरह अंतरिम व्यवस्था के तहत स्कूल का संचालन कर रहा है, जिससे छात्रों का भविष्य अधर में लटका है।
जमीन हस्तांतरण के पेंच में फंसी फाइलें
कोर्ट के संज्ञान में यह बात आई कि दिल्ली सरकार ने सैद्धांतिक रूप से स्कूल चलाने पर सहमति तो दे दी है, लेकिन भूमि हस्तांतरण से जुड़े तकनीकी मुद्दे अभी भी लंबित हैं। केवीएस ने शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर सूचित किया है कि भूमि एवं विकास कार्यालय को अभी तक मंत्रालय की ओर से औपचारिक अनुरोध नहीं भेजा गया है। अदालती कार्यवाही के दौरान फाइलों के एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर घूमने की स्थिति पर पीठ ने गहरी आपत्ति जताई और इसे प्रशासनिक विफलता बताया।
15 मई को होगी मामले की निर्णायक सुनवाई
हाई कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिया है कि वे शिक्षा मंत्रालय और भूमि विभाग की ओर से विस्तृत हलफनामा पेश करें। इसके साथ ही उपराज्यपाल कार्यालय और दिल्ली सरकार को भी अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगली सुनवाई 15 मई 2026 को होगी और तब तक सभी पक्षों को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। यह मामला राजधानी में शिक्षा के बुनियादी ढांचे के प्रति सरकारी विभागों की संवेदनहीनता को उजागर करता है।


