ईरान में अमेरिका का सबसे बड़ा और खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन! 176 विमानों से ऐसे बचाए अपने 2 एयरमैन, ट्रम्प ने खोले राज

World News: अमेरिका ने ईरान की धरती पर एक बेहद खतरनाक और रोमांचक रेस्क्यू मिशन को अंजाम दिया है। किसी हॉलीवुड फिल्म की तरह अमेरिकी सेना ने पैंतालीस घंटे तक यह अभियान चलाया। इस बड़े ऑपरेशन में एक सौ छिहत्तर विमानों का इस्तेमाल किया गया। दुश्मन के इलाके से दो अमेरिकी एयरमैन को सुरक्षित बाहर निकाला गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस पूरे अभियान की सफलता पर अहम जानकारी दुनिया के सामने रखी है।

ईरान को चकमा देने के लिए उतरे एक सौ पचपन विमान

व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप ने इस जटिल मिशन की पूरी जानकारी दी। एयरमैन को बचाना बहुत चुनौतीपूर्ण था। इसके लिए एक सौ पचपन विशेष विमानों की मदद ली गई। इन विमानों का मुख्य मकसद ईरानी सेना को भ्रमित करना था। ईरानी सेना लगातार अमेरिकी पायलटों की तलाश कर रही थी। यह मिशन एक साथ सात अलग-अलग जगहों पर चलाया गया। इनमें से केवल एक ही जगह असली थी। बाकी छह जगहों पर ईरानी सेना को सिर्फ गुमराह किया गया।

बिना पलक झपकाए पैंतालीस घंटे चला यह खतरनाक रेस्क्यू मिशन

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस मिशन को बहुत खास बताया। उन्होंने कहा कि यह मिशन बिना रुके लगातार चलता रहा। पैंतालीस घंटे और छप्पन मिनट तक सेना ने पूरा तालमेल बनाए रखा। एयर फोर्स जनरल डैन केन ने भी इस बड़े बेड़े की तारीफ की। इस बेड़े ने दो बेहद खतरनाक बचाव अभियानों को सफल बनाया। पायलट और वेपन सिस्टम ऑफिसर को सुरक्षित उनके घर वापस लाया गया। इस दौरान सेना के अधिकारियों की धड़कनें तेज थीं।

ट्रंप ने माना ईरान का निशाना था एकदम सटीक और भाग्यशाली

ईरान ने अमेरिकी वायुसेना का एफ-15ई स्ट्राइक ईगल विमान मार गिराया था। अट्ठाइस फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला बड़ा नुकसान था। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि यह दुश्मन का एक भाग्यशाली निशाना था। ट्रंप ने कहा कि किस्मत कभी-कभी दुश्मन का भी साथ दे देती है। लेकिन अमेरिका की किस्मत बहुत अच्छी थी। दोनों जवान बिना नुकसान के सुरक्षित वापस लौट आए। यह अमेरिका के लिए एक बड़ी सैन्य जीत है।

अमेरिकी सेना ने पहले भी उठाए हैं युद्ध में कई बड़े नुकसान

अमेरिकी सेना ने इससे पहले भी अपनी गलतियां मानी हैं। कुवैत में एक फ्रेंडली फायर की घटना सामने आई थी। इसमें सेना ने अपने तीन स्ट्राइक ईगल विमान खो दिए थे। इसके अलावा सऊदी अरब के बेस पर भी ईरानी हमला हुआ था। उस बड़े हमले में अमेरिका ने एक दर्जन ड्रोन विमान गंवाए थे। इराक में एक दुर्घटना के दौरान एक टैंकर विमान भी नष्ट हो गया था। इस युद्ध के माहौल में यह रेस्क्यू ऑपरेशन काफी अहमियत रखता है।

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