रूस के नौसैनिक जहाजों पर यूक्रेन का भीषण प्रहार! काला सागर में मची भारी तबाही, क्या अब परमाणु युद्ध छिड़ेगा?

Russia News: मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच मचे घमासान के बीच यूक्रेन ने रूस पर अब तक का सबसे बड़ा रणनीतिक हमला कर दिया है। यूक्रेनी सेना ने रविवार को काला सागर में स्थित रूसी नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया। इस भीषण हमले ने युद्ध के मोर्चे पर रूस को बैकफुट पर ला दिया है। यूक्रेन के इस साहसी कदम से पूरे यूरोप में एक बार फिर बड़े युद्ध का खतरा मंडराने लगा है।

काला सागर में रूसी नौसेना को भारी चोट

यूक्रेन की विशेष सैन्य इकाइयों ने सेबास्तापोल बे के पास रूसी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों की बरसात कर दी है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उन्होंने रूस के दो आधुनिक नौसैनिक जहाजों को मार गिराया है। इस हमले में रूस के संचार उपकरण और रडार सिस्टम भी पूरी तरह तबाह हो गए हैं। हालांकि, मास्को ने अभी तक जहाजों के डूबने की खबरों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

तुयाप्से रिफाइनरी पर ड्रोन हमला, एक की मौत

यूक्रेन ने अपनी रणनीति बदलते हुए रूस की आर्थिक शक्ति पर सीधा प्रहार किया है। रविवार को रूस की प्रतिष्ठित तुयाप्से तेल रिफाइनरी पर यूक्रेनी ड्रोन्स ने हमला बोला। यह प्लांट रूस के लिए प्रतिदिन 2,40,000 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है। रूसी प्रशासन ने इस हमले की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना में एक व्यक्ति ने अपनी जान गंवाई है। रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उन्होंने 112 ड्रोन्स मार गिराए हैं।

ईरान संकट ने यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ाई

पिछले चार सालों से जारी इस खूनी संघर्ष ने दोनों देशों की कमर तोड़ दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल ईरान के साथ बढ़ते तनाव में उलझे हुए हैं। विशेषज्ञों को डर है कि यदि अमेरिका का ध्यान मध्य पूर्व की ओर मुड़ गया, तो यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य सहायता रुक सकती है। यूक्रेनी सेना पूरी तरह अमेरिकी हथियारों पर निर्भर है। सहायता कम होने की स्थिति में रूस दोबारा यूक्रेन पर हावी हो सकता है।

ग्लोबल इकोनॉमी और तेल बाजार पर संकट

यूक्रेन द्वारा रूसी तेल रिफाइनरी को निशाना बनाने से दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। रूस ऊर्जा का प्रमुख निर्यातक है और रिफाइनरी पर हमले से तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ेगा। खाड़ी क्षेत्र और रूस-यूक्रेन के दोहरे संकट ने वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

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