Hungary News: हंगरी के जालेगेर्सजेग शहर में यूरोपीय संघ के करीब 1.5 मिलियन डॉलर (500 मिलियन फोरिंट) से एक गोलचक्कर बनाया गया है। यह गोलचक्कर बीच खेतों में अधूरा पड़ा है। इसका कोई रास्ता नहीं जुड़ता। इसे एक बड़े रेलवे कंटेनर टर्मिनल के लिए बनाया गया था, लेकिन जिस रेलवे लाइन से इसे जोड़ा जाना था, वह अस्तित्व में ही नहीं है। यह मामला चुनावी मुद्दा बन गया है।
चुनाव से पहले गरमाई बेकार परियोजना, विपक्ष ने साधा निशाना
हंगरी में संसदीय चुनाव से पहले यह गोलचक्कर विवादों में आ गया है। विपक्षी दल प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन पर आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि ओर्बन सरकार यूरोपीय संघ के धन का इस्तेमाल दिखावटी और अधूरी परियोजनाओं के लिए कर रही है। स्थानीय लोग इसे ‘दुनिया का वह गोलचक्कर’ कहते हैं जो कहीं से कहीं नहीं जाता। विरोधियों का कहना है कि इस तरह के निर्माण ओर्बन के 16 साल के कार्यकाल की आर्थिक नीतियों का प्रतीक हैं।
यूरोपीय संघ का पैसा और ओर्बन की रणनीति, भ्रष्टाचार के आरोप
आलोचकों का आरोप है कि ओर्बन यूरोपीय संघ को बदनाम करते हुए उससे भारी मात्रा में धन लेते हैं। क्षेत्रीय निवेश फर्म ओरिएन्स के संस्थापक क्रिज्टियन ओर्बन ने कहा कि विक्टर ओर्बन यूरोपीय संघ में सबसे बड़ा स्वार्थी व्यक्ति है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने हंगरी को यूरोपीय संघ का सबसे भ्रष्ट देश बताया है। हंगरी सरकार आमतौर पर इन आरोपों को नकारती है या विपक्ष पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाती है। सीएनएन ने सरकार से टिप्पणी मांगी है।
2021 में रखी गई थी आधारशिला, लेकिन रेलवे लाइन अब भी नदारद
हंगरी के विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्टो ने 2021 में इस टर्मिनल की आधारशिला रखी थी। 2023 के अंत तक स्थानीय नगरपालिका ने यूरोपीय संघ के फंड से यह गोलचक्कर बना लिया। इसका उद्देश्य टर्मिनल के आसपास लॉजिस्टिक्स को आसान बनाना था। लेकिन प्रस्तावित रेलवे लाइन का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ है। अगर यह लाइन अभी शुरू भी होती है, तो इसे बनने में दो साल लग जाएंगे। तब तक यह गोलचक्कर बेकार पड़ा रहेगा।
लॉजिस्टिक्स कंपनी ने खरीदी थी जमीन, टर्मिनल की योजना अधूरी
क्षेत्र में काम करने वाली लॉजिस्टिक्स कंपनी मेट्रांस ने पहले ही जमीन का एक टुकड़ा खरीद लिया था। वह नई रेलवे लाइन से जुड़ने के लिए एक कंटेनर टर्मिनल बनाने की योजना बना रही थी। यह परियोजना मौजूदा यूरोपीय संघ के बजट कार्यकाल के दौरान शुरू हुई, जो 2027 तक चलेगा। अब तक टर्मिनल तो बन गया, लेकिन रेलवे लाइन नहीं बनी। इससे पूरा निवेश अधूरा रह गया है। स्थानीय लोग इस परियोजना को सरकारी धन की बर्बादी का उदाहरण मान रहे हैं।


