Middle East News: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बड़ा बदलाव हुआ है। अब इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए नियंत्रित आवाजाही, वैकल्पिक मार्ग और क्रिप्टो टोल जैसी नई व्यवस्थाएं लागू कर दी गई हैं। ईरान ने युद्धविराम के दौरान प्रतिदिन अधिकतम 15 जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी है।
प्रतिदिन 140 से घटकर केवल 15 जहाज
युद्ध से पहले होर्मुज से रोजाना करीब 140 जहाज गुजरते थे। युद्धविराम के पहले 24 घंटों में केवल एक तेल टैंकर और छह मालवाहक जहाज ही गुजर सके। इनमें एक भारतीय जहाज भी शामिल है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जहाजों के लिए नया समुद्री नक्शा जारी किया है। इससे वे जलमार्ग में बिछी बारूदी सुरंगों से बच सकेंगे।
क्रिप्टो टोल: नई वसूली का तरीका
सबसे चौंकाने वाला बदलाव क्रिप्टोकरेंसी के जरिए टोल वसूली है। कुछ जहाजों से बिटकॉइन या अन्य डिजिटल मुद्रा में शुल्क मांगा जा रहा है। यह कदम पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए उठाया गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नई वित्तीय जटिलताएं पैदा हो रही हैं। शिपिंग कंपनियों की लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ गया है।
ईरान की तीन शर्तें, अमेरिका से बातचीत अटकी
ईरान के उप विदेश मंत्री सईद कातिबजादेह ने कहा कि अमेरिकी आक्रामकता और इजरायली हमले रुकने के बाद ही होर्मुज सामान्य होगा। ईरान ने अमेरिका के सामने तीन शर्तें रखी थीं। पहली- लेबनान में युद्धविराम, दूसरी- ईरान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन न हो, तीसरी- यूरेनियम संवर्धन के अधिकार की मान्यता। अमेरिका तीसरी शर्त को नकार रहा है, जिससे वार्ता मुश्किल में पड़ गई है।
दुनिया के 20 फीसदी तेल का रास्ता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन है। यहां से वैश्विक तेल सप्लाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। एशिया, यूरोप और अमेरिका के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी बाधा से तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव कम न होने पर ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
इजरायल ने लेबनान के वार्ता प्रस्ताव को स्वीकार किया
देर रात नए घटनाक्रम में इजरायल ने लेबनान के वार्ता प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को लेबनान में हमले कम करने की सलाह दी थी। इस पर नेतन्याहू ने लेबनान के साथ सीधे बातचीत शुरू करने के निर्देश दिए। पाकिस्तान में शुक्रवार को होने वाली अमेरिका-ईरान शांतिवार्ता से पहले यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

