सूखने की कगार पर पाकिस्तान: सिंध-बलूचिस्तान में पानी की भारी किल्लत, चावल उद्योग पर मंडराया संकट

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Islamabad News: पाकिस्तान इस समय एक बेहद गंभीर जल संकट के मुहाने पर खड़ा है। देश के सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में पानी की भारी किल्लत हो गई है। इसके कारण वहां की कृषि, आम जनजीवन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर अब बहुत बड़ा खतरा मंडराने लगा है।

सिंचाई नेटवर्क पर बढ़ते दबाव और प्रांतों के बीच असमान बंटवारे ने इस स्थिति को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया है। सुक्कुर बैराज कंट्रोल रूम के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सिंध प्रांत को मिलने वाले पानी में इस समय लगभग 40 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है।

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सुक्कुर बैराज पर पानी की कुल आवक 50,620 क्यूसेक है, जबकि वहां से निकासी केवल 32,120 क्यूसेक ही हो पा रही है। सिंध की सात मुख्य नहरों के लिए कुल 53,200 क्यूसेक पानी आवंटित है। लेकिन वर्तमान में उन्हें तय कोटे से 21,080 क्यूसेक कम पानी मिल रहा है।

दादू नहर में 85% से ज्यादा की कमी, पंजाब पर लगे गंभीर आरोप

प्रांत की दादू नहर में इस समय सबसे बुरा हाल है। यहाँ निर्धारित 5,997 क्यूसेक के मुकाबले सिर्फ 860 क्यूसेक पानी मिल रहा है, जो कि 85.7% की भारी कमी है। इसके अलावा खैरपुर फीडर वेस्ट में 67.1% और कोट्री बैराज में 55.74% पानी की किल्लत बनी हुई है।

सिंध के सिंचाई विभाग ने ऊपरी हिस्से में स्थित पंजाब प्रांत पर पानी की अत्यधिक निकासी का गंभीर आरोप लगाया है। आंकड़ों के अनुसार, पंजाब अपने निर्धारित कोटे 44,000 क्यूसेक के मुकाबले 53,394 क्यूसेक पानी ले रहा है, जो उनके अधिकार से 21.35% अधिक है।

इस संकट की चपेट में बलूचिस्तान प्रांत भी पूरी तरह आ गया है। वर्ष 1991 के जल बंटवारा समझौते के तहत बलूचिस्तान को उत्तर-पश्चिम नहर से 2,200 क्यूसेक पानी मिलना था। लेकिन पूरी नहर में ही बहाव घटकर 2,100 क्यूसेक रह गया है, जिससे उनका हिस्सा कम हो गया है।

बासमती चावल उद्योग तबाह होने की कगार पर, अरबों का नुकसान

लारकाना चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अनुसार, यह जल संकट पाकिस्तान के सबसे प्रमुख कृषि क्षेत्र को पूरी तरह तबाह कर सकता है। अकेले लारकाना जिले में हर साल लगभग 2,42,000 मीट्रिक टन चावल का उत्पादन होता है, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

यह डिवीजन केवल चावल के निर्यात से देश को सालाना लगभग 90 अरब रुपये की विदेशी मुद्रा कमा कर देता है। इसके अलावा, सिंध की कुल 650 राइस मिलों में से लगभग 500 मिलें अकेले इसी लारकाना क्षेत्र में मौजूद हैं, जिन पर अब बंद होने का खतरा है।

सिंचाई अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पानी की इस कमी के कारण लारकाना, शिकारपुर और बलूचिस्तान के निचले इलाकों में चावल की खेती को भारी नुकसान पहुंचेगा। किसानों को बुवाई में दिक्कत आ रही है, जिससे आने वाले महीनों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था टूटना तय है।

Author: Pallavi Sharma

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