ईरान-अमेरिका के बीच सैन्य टकराव बढ़ा, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले

Tehran News: अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी क्षेत्रों में ताबड़तोड़ हवाई हमले करने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से बड़ा जवाबी हमला किया है। इस कार्रवाई से पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में युद्ध जैसी गंभीर स्थिति बन गई है।

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ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बुधवार तड़के एक संयुक्त सैन्य अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में बहरीन के सलमान पोर्ट और शेख ईसा एयर बेस को निशाना बनाया गया। ईरान का दावा है कि उसने बहरीन और कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस सहित कुल 85 अमेरिकी ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं।

ईरान ने अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन मार गिराने का दावा किया

ईरानी सेना के प्रवक्ता ने एक अन्य बड़े दावे में कहा कि उनकी उन्नत वायु रक्षा प्रणाली ने बुधवार सुबह एक अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया। ईरान के मुताबिक, यह अत्याधुनिक ड्रोन बुशेहर प्रांत के खोरमुज क्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहा था, तभी रक्षा प्रणाली ने इसे निशाना बनाया। हालांकि, अमेरिका ने अभी इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मंगलवार को पुष्टि की थी कि उसने 7 जुलाई को ईरान के भीतर 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए थे। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग को सुरक्षित करना और ईरान की समुद्री हमलावर क्षमता को पूरी तरह से पंगु बनाना था।

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अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका ने की थी बड़ी सैन्य कार्रवाई

अमेरिकी सेना ने ईरान की तटीय रडार प्रणालियों, कमांड सेंटरों और आईआरजीसी की 60 से अधिक छोटी नौकाओं को नष्ट कर दिया था। अमेरिका ने यह कार्रवाई होरमुज जलडमरूमध्य में तीन व्यापारिक तेल टैंकरों पर हुए ईरानी हमलों के बाद की थी। इन जहाजों में मार्शल द्वीप, सऊदी अरब और लाइबेरिया के झंडे वाले कमर्शियल टैंकर शामिल थे।

जून के अंत में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौता (MoU) हुआ था, जिससे संघर्ष कुछ समय के लिए थम गया था। लेकिन इस ताजा सैन्य टकराव ने समझौते को तोड़ दिया है और पूरे क्षेत्र में फिर से अस्थिरता पैदा कर दी है। दोनों देशों के बीच बढ़ती शत्रुता ने बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय युद्ध की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

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