बकरे के लालच में पिंजरे में कैद हुई खूंखार मादा गुलदार, नैनीताल के ग्रामीणों ने ली चैन की सांस

Uttarakhand News: नैनीताल जिले के रामनगर में पिछले काफी समय से दहशत का पर्याय बनी एक मादा गुलदार आखिरकार वन विभाग के जाल में फंस गई है। तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले गोपीपुरा क्षेत्र में यह गुलदार लगातार पालतू मवेशियों और कुत्तों को अपना शिकार बना रही थी। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने जाल बिछाया था, जिसमें बकरे के लालच में आकर यह मादा गुलदार कैद हो गई। इस सफलता के बाद स्थानीय लोगों ने बड़ी राहत महसूस की है।

ग्रामीणों में बढ़ रहा था जानलेवा हमले का डर

आमपोखरा रेंज के हल्दुआ और गोपीपुरा गांव के नजदीक गुलदार की सक्रियता काफी बढ़ गई थी। आए दिन गुलदार को गांव की गलियों और खेतों के पास देखे जाने से ग्रामीणों में भारी दहशत व्याप्त थी। लोगों को डर था कि मवेशियों के बाद गुलदार इंसानों पर भी हमला कर सकती है। इसकी सूचना तुरंत वन विभाग के उच्चाधिकारियों को दी गई, जिसके बाद डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्या ने गुलदार को ट्रेंकुलाइज करने या पकड़ने की औपचारिक अनुमति ली।

बकरे के लालच ने गुलदार को बनाया कैदी

वन विभाग की टीम ने शनिवार को गोपीपुरा के पास वन क्षेत्र में एक विशेष लोहे का पिंजरा लगाया था। इस पिंजरे के भीतर शिकार के तौर पर एक बकरे को रखा गया था। पिंजरे की बनावट ऐसी थी कि बकरा और गुलदार के बीच एक सुरक्षित पार्टिशन था। रात के अंधेरे में जैसे ही मादा गुलदार बकरे का शिकार करने के लिए पिंजरे के भीतर दाखिल हुई, स्वचालित दरवाजा बंद हो गया और वह कैद हो गई। इस दौरान बकरा पूरी तरह सुरक्षित रहा।

सुरक्षित जंगल में किया गया शिफ्ट

रविवार सुबह जब वन कर्मी पिंजरे का निरीक्षण करने पहुंचे, तो उन्होंने मादा गुलदार को कैद पाया। पिंजरे के भीतर गुलदार बार-बार गुर्राकर निकलने की कोशिश कर रही थी। रेंजर खनायत और उनकी रेस्क्यू टीम ने सावधानीपूर्वक पिंजरे को वाहन में लादा। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद गुलदार को पूरी तरह स्वस्थ पाया गया और उसे आबादी से दूर घने जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया। विभाग ने ग्रामीणों को अभी भी सतर्क रहने की सलाह दी है।

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