Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची में अवैध बालू का काला कारोबार पूरी तरह बेखौफ हो चुका है। एक दैनिक समाचार पत्र की खोजी टीम के स्टिंग ऑपरेशन में इसका चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बालू माफिया खुलेआम ग्राहकों को रात के अंधेरे में सुरक्षित डिलीवरी की गारंटी दे रहे हैं।
स्थानीय पुलिस की कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए माफियाओं का पूरा नेटवर्क हर समय सक्रिय रहता है। रात होते ही बालू लदे ओवरलोड वाहन शहर की मुख्य सड़कों पर अत्यधिक तेज रफ्तार में दौड़ने लगते हैं। इस पूरे खेल को बेहद चालाकी से अंजाम दिया जा रहा है।
माफियाओं की एक विशेष टीम मुख्य गाड़ियों के आगे-आगे चलकर पूरे रास्ते की रेकी करती है। इस बड़े नेटवर्क के खुलेआम चलने से अब स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध धंधा लगातार फल-फूल रहा है।
रात 10 बजे के बाद सक्रिय होता है सिंडिकेट
खोजी टीम की पड़ताल के मुताबिक बालू माफियाओं का यह सिंडिकेट रात 10 बजे के बाद सबसे ज्यादा सक्रिय होता है। माफियाओं का दावा है कि रात के समय भारी वाहनों की चेकिंग का खतरा बहुत कम होता है। वे रास्तों की पल-पल की सटीक सूचना ड्राइवरों को देते हैं।
यदि रास्ते में कहीं भी पुलिस चेकिंग की भनक लगती है, तो वाहनों का मार्ग तुरंत बदल दिया जाता है। माफिया बेखौफ होकर कहते हैं कि उनका यह काम रोज चलता है और कोई दिक्कत नहीं आएगी। इस कारण देर रात तेज रफ्तार गाड़ियां सड़क पर काल बनकर दौड़ती हैं।
आसमान छू रहे हैं दाम फिर भी भारी सप्लाई
रांची में इन दिनों अवैध बालू के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन बाजार में इसकी सप्लाई भरपूर है। स्टिंग में शामिल डीलरों ने बताया कि शहर के हर कोने में बालू पहुंचाई जा रही है। माफियाओं ने मांग के अनुसार वाहनों का अलग-अलग रेट चार्ट तय कर रखा है।
वर्तमान में अवैध बालू के लिए टेम्पो का किराया 1200 रुपये और ट्रैक्टर का 3000 रुपये वसूला जा रहा है। वहीं टर्बो गाड़ी के लिए 6000 रुपये और बड़े हाइवा के लिए सीधे 40 हजार रुपये तक की भारी-भरकम कीमत वसूली जा रही है। इस खेल से सरकारी राजस्व को भारी चपत लग रही है।
माफिया यह बालू मुख्य रूप से कांची नदी, नागफेनी नदी, सिल्ली और छापर के तटीय इलाकों से चुरा रहे हैं। शहर में तेजी से बन रहे नए अपार्टमेंट और बड़े व्यावसायिक भवनों के कारण इसकी मांग बहुत ज्यादा है। बिल्डर्स मोटी रकम देकर आसानी से बालू खरीद रहे हैं।
नदियों के अस्तित्व पर संकट और प्रशासन की चुप्पी
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों से अंधाधुंध अवैध खनन आने वाले समय में भयंकर सूखा ला सकता है। बालू के खत्म होने से नदियों का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है। इससे भूमिगत जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है, जो इंसानी आबादी के लिए बेहद खतरनाक है।
इन तमाम खतरों के बाद भी खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बना हुआ है। इतनी बड़ी संख्या में ट्रकों का गुजरना और अधिकारियों का अंजान बने रहना मिलीभगत की ओर इशारा करता है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब जनता जवाब मांग रही है।
स्टिंग ऑपरेशन में रिकॉर्ड हुई माफिया की बातचीत
खोजी पत्रकार ने जब ग्राहक बनकर मुख्य बालू माफिया से संपर्क किया, तो उसकी बातचीत रिकॉर्ड हो गई। रिपोर्टर ने पूछा कि क्या बालू मिल जाएगी और काम सुरक्षित होगा। इस पर माफिया ने बिना किसी डर के कहा कि रात में गाड़ी सीधे आपके प्लॉट पर पहुंच जाएगी।
माफिया ने आगे भरोसा देते हुए कहा कि पुलिस से डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। हमारे लड़के आगे रहकर रास्ता साफ रखते हैं। उसने बताया कि ट्रैक्टर का रेट तीन हजार और टर्बो का छह हजार लगेगा। बालू मुख्य रूप से सिल्ली और छापर से लोड होकर आएगी।
Author: Rohit Mahato

