मनाली हाईवे पर ‘डयोड मोड़’ बना मौत का कुआं: दरक रहा है पहाड़, बरसात से पहले मंडराया बड़ा खतरा

Mandi News: हिमाचल प्रदेश में मनाली हाईवे पर पंडोह डैम से दो किलोमीटर आगे स्थित डयोड मोड़ इस समय सबसे संवेदनशील और खतरनाक प्वाइंट बन गया है। साल 2025 की भारी बरसात के दौरान यहां फोरलेन सड़क का करीब 100 मीटर हिस्सा पूरी तरह धंस गया था।

इस हादसे के बाद से यह पूरा इलाका लगातार लैंडस्लाइड की जद में है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मुख्य सड़क के एक तरफ गहरी खाई है और दूसरी तरफ बेहद कमजोर पहाड़ है। आगामी मानसून सीजन शुरू होते ही यहां किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है।

इस व्यस्ततम मार्ग से हर दिन हजारों पर्यटक और स्थानीय वाहन गुजरते हैं। पहाड़ी से लगातार गिरते बड़े-बड़े पत्थर और मलबे के कारण यात्रियों की जान हमेशा जोखिम में रहती है। चट्टानों के सीधे सड़क पर गिरने से यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

हादसे को बीता एक साल, लेकिन अब तक नहीं हुआ कोई पुख्ता इंतजाम

पिछले वर्ष हुई इस बड़ी लैंडस्लाइड की घटना के बाद उम्मीद थी कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) यहां कोई ठोस कदम उठाएगा। हालांकि, एक साल बीत जाने के बाद भी अब तक इस जगह पर सुरक्षा का कोई परमानेंट इलाज नहीं किया जा सका है।

सड़क के ऊपरी हिस्से में मौजूद पहाड़ी पर लगातार चौड़ी होती दरारें भविष्य के लिए बड़ी चेतावनी हैं। मिट्टी और चट्टानों की पकड़ कमजोर होने से अब भूस्खलन का दायरा बढ़कर लगभग 200 मीटर तक पहुंच चुका है, जिससे खतरा दोगुना हो गया है।

कमजोर पहाड़ी के कारण ढह गई थीं पहले बनी मजबूत दीवारें

फोरलेन निर्माण में जुटी कंपनी के टीम लीडर आदर्श पन्होत्रा ने बताया कि धंसे हुए हिस्से पर फिलहाल क्रेट वाल लगाकर काम चलाया जा रहा है। यहां की भौगोलिक स्थिति इतनी जटिल है कि पहले बनाई गईं मजबूत प्रोटेक्शन वाल भी ढह चुकी हैं।

एनएचएआई (NHAI) द्वारा इस पूरे डेंजर जोन का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जा रहा है। भू-वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही यहां कोई स्थायी और मजबूत स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। फिलहाल अस्थायी सुरक्षा के सहारे ही वाहनों की आवाजाही हो रही है।

स्थानीय ग्रामीणों और पंचायतों ने की विशेष चेतावनी प्रणाली की मांग

हटोण पंचायत की प्रधान अनीता देवी और देवरी के प्रधान तुलसी राम सहित कई ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि बरसात का मौसम पूरी तरह सक्रिय होने से पहले यहां पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

ग्रामीणों का कहना है कि डयोड मोड़ पर तुरंत रॉक फॉल बैरियर, मजबूत रिटेनिंग वॉल और अत्याधुनिक चेतावनी प्रणाली लगाई जानी चाहिए। इसके साथ ही भूस्खलन की स्थिति में वाहनों को रोकने के लिए चौबीसों घंटे विशेष निगरानी व्यवस्था तैनात करना बेहद जरूरी है।

Author: Sunita Gupta

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