भारत में पहली मोबाइल कॉल कब और किसने की? उस दौर का बिल सुनकर उड़ जाएंगे आपके होश!

Himachal News: भारत में आज हर किसी के हाथ में मोबाइल फोन मौजूद है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में पहली मोबाइल कॉल किसने की थी? यह ऐतिहासिक काम हिमाचल प्रदेश के दिग्गज नेता पंडित सुखराम ने किया था। उन्हें देश में दूरसंचार क्रांति का असली मसीहा कहा जाता है। हाल ही में मंडी में उनके निधन के चार साल पूरे होने पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के कई बड़े नेताओं ने उन्हें याद किया।

भारत में पहली मोबाइल कॉल का ऐतिहासिक दिन

देश में पहली मोबाइल कॉल इकतीस जुलाई उन्नीस सौ पचानवे को की गई थी। यह बातचीत पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु और केंद्रीय दूरसंचार मंत्री पंडित सुखराम के बीच हुई थी। ज्योति बसु उस समय कोलकाता के राइटर्स बिल्डिंग में बैठे थे। वहीं पंडित सुखराम दिल्ली के संचार भवन में मौजूद थे। इस ऐतिहासिक फोन कॉल के लिए नोकिया के हैंडसेट का उपयोग किया गया था। इस कॉल ने नई दुनिया खोल दी थी।

आठ रुपये से ज्यादा था एक मिनट का कॉल रेट

आज के समय में वॉयस कॉल लगभग मुफ्त है। लेकिन उस दौर में मोबाइल से बात करना बहुत महंगा शौक था। पच्चीस साल पहले मोबाइल कॉल का रेट आठ रुपये चालीस पैसे प्रति मिनट तय किया गया था। सबसे खास बात यह थी कि कॉल करने वाले के साथ-साथ फोन सुनने वाले को भी पैसे चुकाने पड़ते थे। इसके बावजूद यह सेवा बहुत लोकप्रिय हुई। सुखराम की दूरदर्शी सोच से आज नेटवर्क बिछ पाया।

पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

पंडित सुखराम के निधन को चार साल पूरे होने पर उनके परिजनों ने मंडी में ब्रह्मभोज का आयोजन किया। ग्यारह मई दो हजार बाईस को उनका देहावसान हुआ था। इस विशेष मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह मौजूद रहीं। दोनों नेताओं ने सुखराम की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए। सभी ने एक सुर में कहा कि संचार क्रांति में उनके अहम योगदान को देश कभी नहीं भुला सकता। आज मोबाइल क्रांति उन्हीं की देन है।

मंडी सदर में आज भी कायम है परिवार का दबदबा

पंडित सुखराम को हिमाचल की राजनीति का चाणक्य माना जाता था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कुल तेरह चुनाव लड़े थे। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में शुरुआत करके उन्होंने कांग्रेस और भाजपा दोनों में काम किया। उन्होंने हिमाचल विकास कांग्रेस नाम से अपना एक अलग दल भी बनाया था। मंडी सदर विधानसभा सीट पर उनके परिवार का एकछत्र राज रहा है। विधायक पुत्र अनिल शर्मा और पौत्र आश्रय शर्मा आज भी उनकी मजबूत विरासत आगे बढ़ा रहे हैं।

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