ज्येष्ठ का ‘बड़ा मंगल’ और जाखू मंदिर का रहस्य: क्या आज भी शिमला की पहाड़ियों में मौजूद हैं बजरंगबली के पदचिह्न?

Himachal News: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के ‘बड़े मंगल’ का आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक माना जाता है। इस पावन अवसर पर भक्त संकटमोचन हनुमान की विशेष आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। शिमला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित जाखू मंदिर इस समय केंद्र बिंदु बना हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का सीधा संबंध रामायण काल से है। मान्यता है कि यहां बजरंगबली ने संजीवनी बूटी की खोज के दौरान विश्राम किया था।

संजीवनी बूटी और यक्ष ऋषि की पौराणिक कथा

रामायण के युद्ध प्रसंग के अनुसार, जब लक्ष्मण मेघनाद के प्रहार से मूर्छित हुए, तब हनुमान जी संजीवनी लेने हिमालय निकले थे। मार्ग में जाखू पहाड़ी की दिव्यता देख वे यहां रुके थे। उस समय यहां यक्ष ऋषि तपस्या कर रहे थे, जिनसे हनुमान जी ने द्रोणागिरी पर्वत का मार्ग पूछा था। ऋषि की सूचना के बाद ही वे सही दिशा में आगे बढ़े थे। आज भी स्थानीय श्रद्धालु मानते हैं कि पहाड़ी पर हनुमान जी के चरणों की दिव्य ऊर्जा विद्यमान है।

8 हजार फीट की ऊंचाई पर हनुमान की भव्य उपस्थिति

समुद्र तल से लगभग 8 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर बादलों के बीच बसा है। मंदिर परिसर में स्थापित हनुमान जी की 108 फीट ऊंची प्रतिमा पर्यटकों और श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। यह प्रतिमा दूर से ही दिखाई देती है और शक्ति का संचार करती है। ऊंचे देवदार के वृक्षों और ठंडी हवाओं के बीच यह स्थान केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

बड़े मंगल पर उमड़ता श्रद्धा का सैलाब

ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल पर जाखू मंदिर में विशेष अनुष्ठान और भंडारे आयोजित किए जाते हैं। हजारों श्रद्धालु कठिन पैदल चढ़ाई पार कर मंदिर पहुंचते हैं। भक्तों का विश्वास है कि इस पवित्र स्थान पर मत्था टेकने से सभी रोग, शोक और नकारात्मक बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। हनुमान जयंती और विशेष मंगलवार को यहां की रौनक देखते ही बनती है। भक्त इसे अपनी श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र मानते हैं जहां हर मनोकामना पूरी होती है।

भक्तों के लिए जाखू मंदिर की महत्वपूर्ण जानकारी

शिमला के रिज मैदान से जाखू मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्त पैदल मार्ग या रोप-वे का उपयोग करते हैं। पहाड़ी रास्ता रोमांच और भक्ति का अनूठा अनुभव प्रदान करता है। मंदिर के पास बड़ी संख्या में वानर मौजूद रहते हैं, जिन्हें बजरंगबली का रूप मानकर लोग भोजन कराते हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं के कड़े इंतजाम किए हैं। बड़े मंगल के दिन यहां सुरक्षा व्यवस्था और भी पुख्ता कर दी जाती है।

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