Haryana News: हरियाणा के राखीगढ़ी में हड़प्पा कालीन सभ्यता के रहस्यों को सुलझाने के लिए जारी उत्खनन में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम को टीला नंबर एक पर करीब छह मीटर की गहराई में रेतीली मिट्टी मिली है। यह खोज इस बात की ओर ठोस संकेत करती है कि प्राचीन काल में यहाँ कोई विशाल जलधारा या नदी प्रवाहित होती थी। राखीगढ़ी को इस प्राचीन सभ्यता का एक ‘मेगा सिटी’ माना जाता है, जो संभवतः दृशद्वती नदी के तट पर विकसित हुआ था।
150 किलो क्षमता वाला विशाल जार मिला
पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़े आकार का मिट्टी का स्टोरेज जार प्राप्त हुआ है। इस जार की विशेषता यह है कि इसका मुख एक अन्य छोटे बर्तन से सावधानीपूर्वक बंद किया गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस विशाल पात्र में लगभग 150 किलो अनाज संग्रहित करने की क्षमता है। यह पहली बार है जब राखीगढ़ी में इतनी बड़ी भंडारण इकाई मिली है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इसे खोलने पर उस काल की खान-पान शैली या किसी कीमती वस्तु के प्रमाण मिल सकते हैं।
प्राचीन संरचना को समझने के लिए नई योजना
अधीक्षण पुरातत्वविद मनोज सक्सेना ने बताया कि टीला एक और तीन के बीच जल स्रोत के प्रमाण मिलना एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है। इसके अलावा खुदाई में कच्ची ईंटों की दीवारें, मृदभांडों के अवशेष और हड्डियों के टुकड़े भी मिले हैं। इन नमूनों को सटीक कालखंड की पहचान के लिए टीएल (TL) डेटिंग हेतु दिल्ली भेजा जाएगा। एएसआई अब तीन से चार मीटर और अधिक गहराई तक खुदाई करने का रोडमैप तैयार कर रही है, ताकि इस ऐतिहासिक संरचना की परतों को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके।


