Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके हौजखास से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। यहाँ एक मकान के एसी में अचानक भयंकर आग लग गई। इस हादसे में फंसे देश के वरिष्ठ रिटायर्ड आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार की दम घुटने से मौत हो गई।
वह वर्ल्ड बैंक समेत भारत सरकार के कई अत्यंत महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना के बाद भी फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बहुत देर से पहुंचीं। इस लापरवाही की वजह से ही आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था।
समय पर मदद न मिलने से धनेंद्र कुमार मकान के भीतर ही बुरी तरह फंस गए। दमकल कर्मियों ने उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक उनका निधन हो चुका था। इस घटना के बाद से ही स्थानीय निवासियों में प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा देखा जा रहा है।
पूर्व सीसीआई चेयरमैन धनेंद्र कुमार का शानदार प्रशासनिक सफर
भारत की आर्थिक नीतियों और नौकरशाही को नई दिशा देने वाले धनेंद्र कुमार का प्रशासनिक करियर बेहद प्रभावशाली रहा। साल 1946 में जन्मे धनेंद्र कुमार 1968 बैच के बेहद काबिल भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी थे। उन्होंने देश हित में कई बड़े ऐतिहासिक फैसले लिए थे।
अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार में कई सर्वोच्च पदों की जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने देश के प्रतिस्पर्धा कानून को मजबूत करने और बड़े आर्थिक सुधारों को धरातल पर लागू करने में एक बेहद मार्गदर्शक और सक्रिय भूमिका निभाई थी।
उन्होंने केंद्र सरकार के कई सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में बतौर सचिव देश की सेवा की थी। इनमें रक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय जैसे बड़े विभाग शामिल हैं। रक्षा सचिव के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों को बहुत कुशलता से संभाला था।
सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और संस्कृति संरक्षण में योगदान
सड़क परिवहन मंत्रालय में रहते हुए उन्होंने देश के बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया। इसके अलावा संस्कृति मंत्रालय के सचिव के रूप में उन्होंने भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का काम किया। वह ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (REC) के चेयरमैन भी रहे।
धनेंद्र कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का नाम बहुत ऊंचा किया था। वह नवंबर 2005 से जनवरी 2009 तक वर्ल्ड बैंक में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहे। इस दौरान उन्होंने दक्षिण एशियाई देशों की बड़ी विकास परियोजनाओं को गति दी।
वह फरवरी 2009 से जून 2011 तक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के पहले दौर के चेयरमैन रहे। उनके कार्यकाल में ही देश के भीतर प्रतिस्पर्धा कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया गया। उन्होंने बड़ी कंपनियों के बाजार में एकाधिकार को रोकने के लिए नीतियां बनाईं।
राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा नीति के निर्धारण में निभाई मुख्य भूमिका
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा नीति का मसौदा तैयार करने के लिए धनेंद्र कुमार की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने आर्थिक सुधारों के लिए काम किया। रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की मंजूरी आसान बनाने के लिए उन्होंने सैप्रेप कमेटी का नेतृत्व किया।
उन्होंने हरियाणा में औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखी थी। वह हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और एचएसआईआईडीसी (HSIIDC) के चेयरमैन रहे। राज्य में शानदार इंडस्ट्रियल पार्क्स बनाने के लिए उन्हें प्रतिष्ठित नेशनल सिटिजन्स अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।
उन्हें लोक सेवा में बेहतरीन योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली थी। शुरुआती करियर में वह करनाल और जींद के डिप्टी कमिश्नर रहे। इसके अलावा उन्होंने लेबर कमिश्नर और डायरेक्टर ऑफ इंडस्ट्रीज जैसे अहम पदों पर भी अपनी प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाया था।
लंदन में रेजिडेंट डायरेक्टर और नीतिगत मामलों में सक्रियता
उन्होंने लंदन स्थित इंडियन इन्वेस्टमेंट सेंटर में रेजिडेंट डायरेक्टर के तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव हासिल किया था। इसके साथ ही उन्होंने भारत सरकार के कृषि मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय और संचार मंत्रालय जैसे अहम विभागों में भी अपनी उत्कृष्ट सेवाएं दी थीं।
अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी धनेंद्र कुमार देश की नीतियों और कॉरपोरेट मामलों में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। वह कॉम्पैड (COMPAD) के संस्थापक चेयरमैन थे। वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स में स्कूल ऑफ कॉम्पिटिशन लॉ के चीफ मेंटर भी रहे।
उनके अचानक निधन से देश के प्रशासनिक और आर्थिक जगत को एक बहुत बड़ी और अपूरणीय क्षति हुई है। दिल्ली पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर हादसे के सही कारणों का पता लगाने के लिए मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
Author: Gaurav Malhotra


