London News: टेनिस की दुनिया को एक नया ग्लोबल सुपरस्टार मिल गया है। चेक रिपब्लिक की महज 21 साल की सनसनी लिंडा नोस्कोवा ने 1 जुलाई को ऑल इंग्लैंड क्लब के ऐतिहासिक सेंटर कोर्ट पर इतिहास रच दिया। उन्होंने अपनी हमवतन कैरोलिना मुचोवा को हराकर विंबलडन 2026 का विमेंस सिंगल्स खिताब जीता।
बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबले में नौवीं सीड लिंडा नोस्कोवा ने कैरोलिना मुचोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से करारी शिकस्त दी। विंबलडन के पूरे इतिहास में यह पहली बार हुआ जब दो चेक खिलाड़ी खिताबी भिड़ंत में आमने-सामने थीं। इस शानदार जीत से नोस्कोवा को 38.5 करोड़ रुपये की इनामी राशि मिली।
भावुक लिंडा नोस्कोवा ने अपनी दिवंगत मां को समर्पित की ऐतिहासिक ट्रॉफी
खिताब जीतते ही लिंडा नोस्कोवा कोर्ट पर बैठ गईं और उनके आंसू छलक पड़े। ट्रॉफी लेने के बाद स्पीच के दौरान वे काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने आसमान की तरफ देखते हुए अपनी दिवंगत मां इवाना को याद किया, जिनका दो साल पहले विंबलडन की शुरुआत से ठीक पहले निधन हो गया था।
लिंडा नोस्कोवा ने इस शानदार जीत के साथ एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा लिया है। वह साल 2011 में पेट्रा क्वितोवा के बाद विंबलडन खिताब जीतने वाली सबसे युवा महिला खिलाड़ी बन गई हैं। वे विंबलडन विमेंस सिंगल्स जीतने वाली इतिहास की छठी चेक टेनिस खिलाड़ी हैं।
चेक रिपब्लिक की नोस्कोवा पिछले 4 सालों में विंबलडन जीतने वाली तीसरी चेक खिलाड़ी बन गई हैं। उनसे पहले साल 2023 में मार्केटा वोंद्रोशोवा और 2024 में बारबोरा क्रेजिकोवा ने यह बड़ा कारनामा किया था। इतिहास में नवरातिलोवा, नोवोत्ना और क्वितोवा भी यह गौरव हासिल कर चुकी हैं।
गर्ल्स सिंगल्स चैंपियन से ग्रैंड स्लैम विनर बनने तक का सफर
लिंडा नोस्कोवा का जन्म चेक रिपब्लिक के वसेतिन शहर में हुआ था। उन्होंने बचपन में ही टेनिस रैकेट थाम लिया था। अपनी मजबूत बेसलाइन हिटिंग और परिपक्व खेल के दम पर उन्होंने साल 2021 का फ्रेंच ओपन गर्ल्स सिंगल्स खिताब जीता था। यह नोस्कोवा के करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब है।
नोस्कोवा की यह ऐतिहासिक जीत कोई रातों-रात हुआ चमत्कार नहीं है। उन्होंने साल 2024 के ऑस्ट्रेलियन ओपन में दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी इगा स्वियातेक को हराकर तहलका मचाया था। इसी जुझारूपन के दम पर उन्होंने इस बार विंबलडन में मैच प्वाइंट बचाया और आखिरकार नई विंबलडन चैंपियन बनकर उभरीं।

