Kanpur News: अध्यात्म और संत परंपरा में सत्ता का कोई मोल नहीं होता है। बाबा नीम करौली ने इसे सच साबित कर दिखाया था। उन्होंने देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और वरिष्ठ नेता गुलजारीलाल नंदा को दर्शन देने से साफ मना कर दिया था। यह अनोखा वाकया आज भी लोगों को हैरान करता है।
बाबा नीम करौली को भगवान हनुमान का साक्षात अवतार माना जाता है। उनके चमत्कारिक किस्से देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मशहूर हैं। यह खास घटना उस समय की है जब बाबा कानपुर शहर के सरसैया घाट पर मौजूद थे। वहां करीब दो सौ आम भक्त उनके अनमोल प्रवचन सुन रहे थे।
उसी दौरान घाट पर अचानक कानपुर के तत्कालीन डीएसपी कुछ पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचे। उन्होंने बाबा को एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने बताया कि देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और बड़े नेता गुलजारीलाल नंदा उनसे मिलना चाहते हैं। पुलिस को लगा कि प्रधानमंत्री का नाम सुनकर बाबा तुरंत मिलने के लिए राजी हो जाएंगे।
प्रोटोकॉल से नाराज हुए बाबा
डीएसपी की बात सुनकर बाबा नीम करौली ने मिलने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके दरबार में सभी भक्त एक समान हैं। पुलिस अधिकारियों ने सोचा कि इतने बड़े नेताओं को वापस भेजना ठीक नहीं है। इसलिए वे दोनों वीवीआईपी नेताओं को सीधे बाबा के पास अंदर ले जाने लगे।
जैसे ही प्रधानमंत्री शास्त्री और नंदा जी बाबा की तरफ आगे बढ़े, वहां एक बड़ा चमत्कार हुआ। लोगों के अनुसार बाबा अचानक एक तेज दिव्य प्रकाश में बदल गए। देखते ही देखते वह अपनी जगह से पूरी तरह अदृश्य हो गए। प्रधानमंत्री और वहां मौजूद सभी बड़े सुरक्षाकर्मी यह नजारा देखकर सन्न रह गए।
सुरक्षाबलों ने पूरी जगह छान मारी लेकिन बाबा का कहीं भी पता नहीं चल सका। दोनों बड़े नेताओं ने काफी देर तक वहां इंतजार किया। जब बाबा वापस प्रकट नहीं हुए तो उन्हें बिना दर्शन किए ही बैरंग लौटना पड़ा। नेताओं के जाने के कुछ ही देर बाद बाबा फिर से वहां आकर बैठ गए।
भक्त और भगवान का सच्चा रिश्ता
नेताओं के जाते ही बाबा को दोबारा देखकर सभी भक्त बुरी तरह हैरान रह गए। एक जिज्ञासु भक्त ने तुरंत उनसे प्रधानमंत्री से न मिलने का बड़ा कारण पूछा। बाबा ने जवाब दिया कि वह आम और खास लोगों में कोई भेदभाव नहीं करते हैं। उन्हें भी एक साधारण इंसान की तरह ही आना चाहिए था।
बाबा ने कहा कि उन नेताओं ने मेरे और भक्तों के बीच पुलिस की दीवार क्यों खड़ी की। अध्यात्म के पावन रास्ते में पद और अहंकार की कोई जगह नहीं होती है। यह सीख आज भी नैनीताल के कैंची धाम में लागू होती है। वहां बड़े से बड़े लोग आम भक्तों की तरह ही दर्शन करते हैं।
Author: Pandit Balkrishan Sharma


