India News: कर्नाटक सरकार में एक बड़ा सियासी भूचाल आने वाला है। राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस के अंदर भारी खींचतान मची हुई है। लगभग 30 वरिष्ठ कांग्रेस विधायक अचानक दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। ये विधायक मंत्री पद की अपनी पुरानी मांग को लेकर राहुल गांधी से मिलने वाले हैं। इस अचानक हुए कदम को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर भारी दबाव बनाने की कोशिश माना जा रहा है। कर्नाटक कांग्रेस में इस नए संकट से पूरी पार्टी सकते में है।
वरिष्ठ विधायकों ने की मंत्री पद की मांग
कांग्रेस विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने इस पूरी घटना की पुष्टि की है। उनका कहना है कि विधायकों के एक बड़े समूह ने बैठक कर मंत्री पद मांगने का फैसला किया है। विधायकों का तर्क है कि जो नेता तीन से पांच बार चुनाव जीत चुके हैं, उन्हें अभी तक मौका नहीं मिला है। पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ विधायक अशोक पाटन ने भी कहा कि वे कैबिनेट में तत्काल फेरबदल चाहते हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने उन्हें दो साल बाद मौका देने का वादा किया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है।
नए विधायकों ने भी तेज किया दबाव
केवल वरिष्ठ विधायक ही नहीं, बल्कि पहली बार चुनाव जीतने वाले युवा विधायक भी इस दौड़ में शामिल हो गए हैं। हाल ही में 38 नए विधायकों ने पार्टी आलाकमान को एक कड़ा पत्र लिखा था। उनकी मांग है कि कैबिनेट फेरबदल के दौरान कम से कम पांच नए विधायकों को मंत्री बनाया जाए। मांड्या से पहली बार विधायक बने रविकुमार गौड़ा ने कहा कि हर कोई राज्य की सेवा करने के लिए मंत्री बनना चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान ही करेगा।
क्या सिद्धारमैया और शिवकुमार में छिड़ी है जंग?
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा विधायक आर अशोक ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के 30 विधायक नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर दिल्ली गए हैं। अशोक के अनुसार, एक गुट उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को अगला मुख्यमंत्री बनाना चाहता है। वहीं दूसरा गुट मौजूदा सीएम सिद्धारमैया को कुर्सी पर बनाए रखना चाहता है। भाजपा नेता का कहना है कि यह कांग्रेस के भीतर गहरी कलह का साफ संकेत है।


