Kangra News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एसिड अटैक केस में एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस जघन्य मामले में दोषी ठहराए गए अपराधियों की सजा को निलंबित करने की याचिका पूरी तरह खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ किया कि अपराधियों को कोई राहत नहीं मिलेगी।
हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की बेंच ने यह सख्त आदेश दिया। अदालत ने कहा कि एसिड अटैक किसी भी महिला की डिग्निटी और फिजिकल इंटेग्रिटी पर एक बेहद क्रूर हमला है। इसलिए अपराधियों की सजा रोकने पर कड़े नियम लागू होंगे।
जानिए क्या है यह पूरा क्रिमिनल केस
यह पुराना मामला हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के जवाली पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले एक संस्थान का है। वहां 12 सितंबर 2016 को एक बेकसूर पीड़िता के चेहरे पर बेरहमी से एसिड फेंका गया था। इस भयानक वाकये ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था।
इस संगीन जुर्म में धर्मशाला के सेशन्स कोर्ट ने 29 नवंबर 2025 को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। निचली अदालत ने रेणुका और मोहिंद्र सिंह को इस क्राइम का मेन कल्प्रीट माना था। इसके बाद दोषियों ने हाई कोर्ट में लीगल अपील दायर की थी।
हाई कोर्ट ने इन दोनों क्रिमिनल्स को कोई भी ढील देने से साफ मना कर दिया है। सेशन्स कोर्ट ने इन दोनों दोषियों को धारा 326-ए के तहत 10 साल के रिगोरस इमप्रिजनमेंट यानी कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
अदालत ने दोषियों को दी कड़ी सजा
इसके साथ ही एविडेंस मिटाने यानी सबूत नष्ट करने की धारा 201 के तहत भी उन्हें एक साल की जेल और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा मिली थी। दोनों दोषियों को कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है क्योंकि उनकी रिहाई की उम्मीदें अब खत्म हो चुकी हैं।
हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने लैंडमार्क जजमेंट्स का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि जब किसी ट्रायल में दोष सिद्ध हो जाता है, तो आरोपी का ‘निर्दोष होने का अधिकार’ बिल्कुल खत्म हो जाता है। अब वे कानूनन अपराधी साबित हो चुके हैं।
हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी जोड़ा कि एसिड अटैक जैसे हीनस क्राइम में सजा का सस्पेंशन नॉर्मल तरीके से नहीं किया जा सकता। यह खतरनाक अपराध सीधे तौर पर पीड़िता के जीने के राइट यानी फंडामेंटल राइट को पूरी तरह छीन लेता है।

