तमिलनाडु: थलपति विजय की पहली सियासी जीत, बहुमत का आंकड़ा हुआ पूरा; जानें कैसे साथ आए 120 विधायक

Tamil Nadu News: अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय ने तमिलनाडु की राजनीति में अपनी पहली बड़ी परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली है। बहुमत का आंकड़ा जुटाने के बाद अब उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। विजय ने राजभवन में राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दे दिया है। शपथ ग्रहण समारोह शनिवार, 9 मई को सुबह 11 बजे आयोजित होने की संभावना है।

बहुमत का गणित और छोटे दलों का महत्वपूर्ण साथ

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अकेले 108 सीटें जीती थीं। हालांकि, बहुमत के लिए आवश्यक 117 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए उन्हें सहयोगियों की जरूरत थी। विजय ने पिछले तीन दिनों में सघन राजनीतिक सक्रियता दिखाते हुए अन्य दलों का समर्थन हासिल किया है। वर्तमान में उनके पास 120 विधायकों का ठोस समर्थन है। इसमें कांग्रेस के 5 विधायक और वामपंथी दलों के साथ-साथ वीसीके के विधायकों का समर्थन भी शामिल है।

गठबंधन सरकार में कैबिनेट विस्तार और पद आवंटन का फॉर्मूला

सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विजय ने ‘1-1-1 और 2’ का विशेष फॉर्मूला तैयार किया है। इस समझौते के तहत गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दलों CPI, CPI(M) और VCK को कैबिनेट में एक-एक मंत्री पद दिया जाएगा। वहीं, DMK से नाता तोड़कर विजय का साथ देने वाली कांग्रेस को दो मंत्री पद मिलने की चर्चा है। VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन के स्वयं मंत्रिमंडल में शामिल होने की प्रबल संभावना है। CPI ने साफ किया है कि उनका समर्थन भाजपा को रोकने के लिए है।

विपक्ष के पुराने सहयोगियों ने बदला तमिलनाडु का सियासी मिजाज

विजय को समर्थन देने वाले अधिकांश दल पहले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थे। राजनीतिक परिस्थितियों के बदलते ही इन दलों ने एम.के. स्टालिन का साथ छोड़कर TVK पर भरोसा जताया है। चुनावी नतीजों में DMK मात्र 59 सीटों पर सिमट गई, जबकि AIADMK को 47 सीटें मिलीं। निर्दलीय और छोटे दलों के समर्थन ने विजय की स्थिति को और मजबूत कर दिया है। राज्यपाल के साथ चला लंबा गतिरोध भी अब विधायकों की सूची सौंपने के बाद समाप्त हो गया है।

सत्ता के गलियारों में विजय की रणनीतिक और राजनीतिक चुनौतियां

मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का सफर विजय के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। उन्हें सरकार बनाने का न्यौता पाने के लिए राजभवन के कई चक्कर लगाने पड़े और सहयोगी दलों के साथ लंबी बातचीत करनी पड़ी। भ्रष्टाचार विरोधी रुख और क्षेत्रीय अस्मिता के मुद्दे पर चुनाव लड़ने वाली TVK के लिए गठबंधन चलाना एक बड़ी परीक्षा होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छोटे दलों को साथ लेकर चलना और प्रशासनिक सुधार लागू करना विजय की सरकार के लिए प्राथमिक प्राथमिकता रहेगी।

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