Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को 54,928 करोड़ रुपये का बजट पारित होने जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। इस बार मंत्रियों और बड़े अधिकारियों के वेतन पर कैंची चली है। हालांकि, दिहाड़ी मजदूरों और स्वास्थ्य कर्मियों को सरकार ने थोड़ी राहत जरूर दी है। दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होगी। विपक्ष के तीखे सवालों और कटौती प्रस्तावों के बीच इस बजट पर मुहर लगेगी।
विकास के लिए 100 में से सिर्फ 20 रुपये
यह बजट पिछले साल के मुकाबले करीब तीन हजार करोड़ रुपये कम है। राज्य की माली हालत जमीनी हकीकत बयां कर रही है। सरकारी खजाने का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और कर्ज चुकाने में चला जाएगा। सरकार हर 100 रुपये में से सिर्फ 20 रुपये ही विकास कार्यों पर खर्च कर पाएगी। इसी संकट को देखते हुए सरकार ने एक सख्त फैसला लिया है। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और बड़े अधिकारियों का वेतन छह महीने के लिए रोक दिया गया है। यह कटौती 3 से लेकर 50 फीसदी तक होगी।
मजदूरों और स्वास्थ्य कर्मियों को मिली संजीवनी
तमाम आर्थिक दिक्कतों के बावजूद कुछ वर्गों का खास खयाल रखा गया है। सरकार ने दिहाड़ी मजदूरों की मजदूरी में सीधे 25 रुपये का इजाफा किया है। नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारियों का वेतन अधिकतम 20 हजार रुपये तक बढ़ाया गया है। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा वर्करों के मानदेय में भी बढ़ोतरी हुई है। आम जनता की सुविधा के लिए बजट में 11 नई योजनाओं का एलान किया गया है। बजट पास होते ही इन योजनाओं को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
विधानसभा में गूंजेंगे जनता से जुड़े अहम मुद्दे
सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान सदन में कई गंभीर मुद्दे उठेंगे। ब्यास नदी में ड्रेजिंग का मामला आज चर्चा के केंद्र में रहेगा। विधायक भुवनेश्वर गौड़ के सवालों पर मुख्यमंत्री खुद जवाब पेश करेंगे। इसके साथ ही प्रदेश के नशा मुक्ति केंद्रों और राज्य चयन आयोग पर भी बहस होगी। विधायक हरदीप बाबा 10 साल की सेवा पूरी कर चुकी आशा वर्करों को नियमित करने की मांग मजबूती से उठाएंगे। विपक्ष के कटौती प्रस्तावों पर चर्चा के बाद अंततः इस बजट को मंजूरी मिल जाएगी।


