प्राइवेट स्कूलों की लूट पर अब लगेगी पक्की लगाम! विधानसभा में शिक्षा मंत्री का ऐलान सुन झूम उठेंगे माता-पिता

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस वसूलने का खेल अब बहुत जल्द खत्म होने वाला है। राज्य सरकार बच्चों के माता-पिता को एक बहुत बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शुक्रवार को विधानसभा में एक अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सुक्खू सरकार जल्द ही शिक्षा के नियमों में बड़ा बदलाव करेगी। इससे निजी स्कूलों की मनमानी और भारी-भरकम फीस पर सीधा नियंत्रण लगेगा। यह फैसला उन हजारों अभिभावकों के लिए बड़ी खबर है, जो हर साल फीस वृद्धि की भारी मार झेलते हैं।

दिल्ली और यूपी की तर्ज पर बदले जाएंगे नियम

विधानसभा में विधायक राम कुमार के एक सवाल पर शिक्षा मंत्री ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक और हरियाणा जैसे राज्यों ने पहले ही फीस नियंत्रण के सख्त नियम बना लिए हैं। अब हिमाचल प्रदेश सरकार भी इन्हीं राज्यों के मॉडल पर अपने नियमों में बड़ा संशोधन करेगी। इससे निजी स्कूलों पर लगाम कसने का एक मजबूत और पारदर्शी कानूनी रास्ता तैयार हो जाएगा।

अभी फीस तय करने का कोई ठोस कानून नहीं

शिक्षा मंत्री ने वर्तमान कानूनी व्यवस्था की भी पूरी जानकारी सदन को दी। अभी हिमाचल प्रदेश रेगुलेशन एक्ट 1997 के तहत निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर नजर रखी जाती है। लेकिन इस पुराने कानून में फीस तय करने का कोई सीधा प्रावधान ही मौजूद नहीं है। इसी वजह से सरकार मौजूदा समय में स्कूलों की फीस खुद तय नहीं कर पाती है। मंत्री ने विधायकों से अपील की है कि ज्यादा फीस वसूलने का कोई भी ठोस मामला सामने आए, तो वे सीधे सरकार को बताएं।

गरीब बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें देना है अनिवार्य

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) को लेकर भी मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और बीपीएल बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। इन 25 प्रतिशत सीटों पर मुफ्त दाखिला देना हर निजी स्कूल के लिए पूरी तरह से अनिवार्य है। यह नियम गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए बनाया गया है।

जागरूकता अभियान से लगभग दोगुनी हुई दाखिलों की संख्या

पहले इन आरक्षित सीटों पर गरीब बच्चों के दाखिले बहुत कम हो रहे थे। पूरे राज्य में ऐसे सिर्फ 650 दाखिले ही हो पाए थे। इसके बाद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने घर-घर जाकर एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान का बड़ा असर हुआ और दाखिलों की संख्या पहले से लगभग दोगुनी हो गई है। शिक्षा मंत्री ने माना कि अभी इस दिशा में और भी ज्यादा काम करने की जरूरत है।

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