मुरादाबाद: काली माता मंदिर महंत विवाद पहुंचा सिविल कोर्ट, जूना अखाड़े के पेश न होने पर अगली सुनवाई 6 जुलाई को

Moradabad News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित लालबाग के सुप्रसिद्ध प्राचीन सिद्धपीठ श्री काली माता मंदिर के महंत पद को लेकर छिड़ा विवाद अब कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया है। मंदिर के पूर्व महंत रामगिरि महाराज ने उन्हें पद से हटाए जाने के फैसले को सिविल कोर्ट में चुनौती दी है। रामगिरि का तर्क है कि उनकी नियुक्ति गुरु परंपरा के अनुसार हुई थी और उन्हें हटाना पूर्णतः अनुचित है। गुरुवार को इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा और अन्य विपक्षी पक्षों को अपना पक्ष रखना था, किंतु उनकी अनुपस्थिति के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

अदालत में नहीं पहुंचा विपक्षी पक्ष, अब 6 जुलाई को सुनवाई

न्यायालय की कार्यवाही के दौरान महंत रामगिरि अपनी कानूनी टीम के साथ उपस्थित रहे, परंतु जूना अखाड़े या अन्य विपक्षी प्रतिनिधियों की ओर से कोई भी हाजिर नहीं हुआ। विपक्ष द्वारा कोई जवाब दाखिल न किए जाने पर अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया है। न्यायालय ने सभी प्रतिवादियों को दोबारा नोटिस जारी करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई के लिए छह जुलाई की तिथि तय की है। जून में ग्रीष्मकालीन अवकाश होने के कारण अब इस मामले पर लंबी अवधि के बाद ही विस्तार से चर्चा हो पाएगी।

न्याय व्यवस्था पर भरोसा और अखाड़े पर सवाल

पूर्व महंत रामगिरि महाराज ने विपक्षी पक्ष के न्यायालय न पहुंचने पर तंज कसते हुए कहा कि अखाड़े के पदाधिकारी जवाब देने से कतरा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अखाड़े के पास उन्हें हटाने का कोई ठोस वैधानिक अधिकार नहीं है और वह अपनी पैरवी प्रभावी ढंग से जारी रखेंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश जौहरी ने भी आश्वस्त किया कि उनके मुवक्किल का पक्ष कानूनी रूप से अत्यंत प्रबल है। गौरतलब है कि इससे पूर्व महंत सज्जन गिरी को भी हटाया गया था, परंतु उन्होंने कानूनी मार्ग अपनाने के बजाय चुप्पी साध ली थी।

नोटिस न मिलने का दावा और अखाड़े की रणनीति

दूसरी ओर, सिद्धपीठ नौ देवी मंदिर के वर्तमान महंत हितेश्वर गिरी ने अपनी अनुपस्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्हें न्यायालय से कोई औपचारिक नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी उन्हें अदालत में उपस्थित होने का कोई विशेष निर्देश नहीं मिला था। इस विवाद में एक अन्य मामला 17 मई को भी लगा हुआ है, जिसमें जूना अखाड़े को अपना पक्ष रखना है। फिलहाल, इस वर्चस्व की जंग ने शहर के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं।

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