New Delhi News: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अब एक लेखक के रूप में अपनी नई पहचान बनाने जा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ तीन दशकों से अधिक समय तक काम करने के अपने अनुभवों को ‘अपनापन’ नामक पुस्तक में पिरोया है। इस बहुप्रतीक्षित पुस्तक का विमोचन 26 मई को नई दिल्ली के पूसा परिसर में होगा। इस खास अवसर पर पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगोड़ा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।
राजनीतिक संस्मरण से कहीं अधिक है यह दस्तावेज
शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, यह पुस्तक केवल एक राजनीतिक संस्मरण नहीं है। यह पीएम मोदी के नेतृत्व, उनकी अनूठी कार्यशैली और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके विजन को एक करीबी सहयोगी की नजर से देखने का एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। चौहान ने बताया कि दुनिया मोदी को एक निर्णायक नेता मानती है, लेकिन उन्होंने उन्हें एक ‘साधक’ और ‘कर्मयोगी’ के रूप में बहुत करीब से महसूस किया है। यह पुस्तक पाठकों को मोदी के व्यक्तित्व के उन पहलुओं से रूबरू कराएगी जो अब तक अनछुए थे।
किताब ‘अपनापन’ की कहानी साल 1991 की ऐतिहासिक एकता यात्रा से शुरू होती है। उस समय शिवराज सिंह चौहान और नरेन्द्र मोदी दोनों ही संगठन में साधारण कार्यकर्ताओं के रूप में सक्रिय थे। शिवराज बताते हैं कि कई लोग उस यात्रा को सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम मान रहे थे। लेकिन मोदी ने अपनी संगठन क्षमता से उसे राष्ट्रीय चेतना के एक बड़े अभियान में बदल दिया था। उनका मकसद सिर्फ श्रीनगर में तिरंगा फहराना नहीं, बल्कि युवाओं में राष्ट्र गौरव जगाना था।
नेतृत्व की तपस्या और मानवीय पक्ष का चित्रण
चौहान ने किताब में उल्लेख किया है कि नेतृत्व की कला सिर्फ भाषण देने से नहीं, बल्कि तपस्या, अनुशासन और समर्पण से आती है। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में कोरोना काल के दौरान किए गए संकट प्रबंधन का भी विस्तार से वर्णन किया गया है। लेखक ने मोदी के राजनीतिक व्यक्तित्व के साथ-साथ उनके मानवीय पक्ष को भी प्रमुखता से उभारा है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो भारतीय राजनीति की कार्य संस्कृति को गहराई से समझना चाहते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में पीएम मोदी के शासन मॉडल पर कई किताबें आई हैं, लेकिन ‘अपनापन’ की खासियत इसका लेखक है। शिवराज सिंह चौहान ने संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर मोदी के साथ लंबा वक्त साझा किया है। इसलिए यह किताब केवल घटनाओं का विवरण नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर की कार्य संस्कृति की एक जीवंत झलक पेश करती है। चौहान ने स्पष्ट किया कि यह पुस्तक केवल प्रशंसा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के उन संकल्पों की कहानी है जिसने देश की राजनीति की दिशा बदली है।


