Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा हवाई अड्डे के पास प्रस्तावित ‘एयरो सिटी’ परियोजना विवादों में घिर गई है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होते ही प्रभावित गांवों के निवासियों ने मुआवजे की दरों पर गहरा रोष जताया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें हवाई अड्डा विस्तार के मुकाबले बहुत कम मुआवजा दिया जा रहा है। मंगलवार को महाल भड़ोत के ग्रामीणों ने इस विसंगति को लेकर उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा से मुलाकात की और अपनी मांगें रखीं।
हवाई अड्डे की तर्ज पर मुआवजे की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासनिक भेदभाव का आरोप लगाते हुए मुआवजे की दरों में भारी अंतर स्पष्ट किया। ग्रामीणों के अनुसार, सरकार एयरो सिटी के लिए उन्हें प्रति कनाल महज 3 से 4 लाख रुपये दे रही है। इसके विपरीत, हवाई अड्डे की जद में आए विस्थापितों को प्रति कनाल 21 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। वीर सिंह और देशराज जैसे ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें समान दर पर मुआवजा नहीं मिला, तो वे उग्र प्रदर्शन करेंगे।
बेहद उपजाऊ है चिह्नित कृषि भूमि
एयरो सिटी के लिए शाहपुर तहसील के महाल भड़ोत में जिस जमीन का चयन हुआ है, वह अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है। बंडी क्षेत्र के लोग इसी भूमि पर खेती करके अपने परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। ग्रामीणों ने उपायुक्त को बताया कि उनकी आजीविका का एकमात्र साधन यह कृषि भूमि ही है। कम सर्कल रेट के आधार पर जमीन का सौदा उन्हें मंजूर नहीं है। वे अपनी उपजाऊ जमीन को औने-पौने दामों पर देने को तैयार नहीं हैं।
जुगेहड़ के सर्कल रेट को बनाने की मांग
महाल भड़ोत के निवासियों ने मुआवजे के लिए एक नया विकल्प भी प्रशासन के समक्ष रखा है। उन्होंने मांग की है कि उनके साथ लगती महाल ‘जुगेहड़’ का सर्कल रेट काफी बेहतर है। प्रशासन को उसी आधार पर मुआवजा तय करना चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जुगेहड़ के सर्कल रेट को आधार नहीं बनाया गया, तो वे अपनी जमीन का अधिग्रहण नहीं होने देंगे। अपनी मांगों को मनवाने के लिए ग्रामीण सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई और ग्रामीणों का रुख
उपायुक्त हेमराज बैरवा ने ग्रामीणों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और मामले की समीक्षा का भरोसा दिया है। हालांकि, ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि विकास के नाम पर किसानों की आजीविका को सस्ते में नहीं छीना जा सकता। आने वाले दिनों में एयरो सिटी परियोजना की राह और कठिन हो सकती है। फिलहाल प्रशासन भूमि अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रियाओं और मुआवजे की गणना में जुटा हुआ है।


