Ghaziabad News: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित इंदिरापुरम की गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में बुधवार सुबह एक भीषण अग्निकांड ने कोहराम मचा दिया। साढ़े आठ बजे लगी इस आग ने देखते ही देखते चार मंजिलों के छह फ्लैटों को अपनी चपेट में ले लिया। आग बुझाने पहुँचे दमकल विभाग के कर्मियों को उस समय भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जब सोसाइटी का पार्क हाइड्रोलिक मशीनों के रास्ते में बाधा बन गया। भारी मशक्कत के बाद टीम ने सोसाइटी के अपने फायर सिस्टम का उपयोग कर आग पर काबू पाया।
धुएं के गुबार से घुटने लगा बुजुर्गों का दम
बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे लगी इस आग का धुआं दो किलोमीटर दूर से ही दिखाई दे रहा था। आग नौवीं मंजिल से शुरू होकर ऊपर की ओर फैलती गई। इस दौरान धुएं में फंसने के कारण दो बुजुर्गों और एक महिला की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। दमकल विभाग ने साहस का परिचय देते हुए बिल्डिंग में फंसे लगभग 20 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुबह 11 बजे लपटों पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
बचाव कार्य में विलेन बना सोसाइटी का पार्क
घटनास्थल पर पहुँचे दमकल कर्मियों ने बताया कि सोसाइटी के पार्क के कारण हाइड्रोलिक सिस्टम बिल्डिंग के करीब नहीं पहुँच पा रहा था। पार्क और ऊंची इमारतों के बीच कम दूरी होने की वजह से मशीनें अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाईं। अंत में दमकल कर्मियों ने एक वैकल्पिक रास्ता निकाला और स्थानीय निवासियों की मदद से बिल्डिंग के आंतरिक फायर सेफ्टी सिस्टम को सक्रिय किया। इसी सिस्टम की मदद से आग की ज्वालाओं को शांत किया जा सका।
कमल पालीवाल के फ्लैट से शुरू हुई थी आग
स्थानीय निवासियों के अनुसार, आग की शुरुआत नौवीं मंजिल पर रहने वाले कमल पालीवाल के फ्लैट से हुई थी। बताया जा रहा है कि उनके घर में पिछले पांच वर्षों से लकड़ी का काम चल रहा था, जिसकी शिकायत पड़ोसी पहले भी कर चुके थे। प्राथमिक जांच में आग लगने का कारण एसी (AC) में शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस और दमकल विभाग की टीमें विस्तृत जांच के बाद ही असली वजह का खुलासा कर पाएंगी।
सीएम योगी ने लिया संज्ञान, अधिकारियों को दी नसीहत
गाजियाबाद के इस भीषण अग्निकांड की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस कमिश्नर और डीएम को तत्काल मौके पर पहुँचने और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीएम के निर्देश के बाद एसडीआरएफ (SDRF) और नगर निगम की टीमें भी मौके पर मुस्तैद नजर आईं।
सुरक्षा मानकों और आर्किटेक्चर पर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे ने ऊंची इमारतों के निर्माण और उनके फायर सेफ्टी ऑडिट पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि बिल्डिंग के नक्शे पास करते समय पार्क और मुख्य ढांचे के बीच दमकल वाहनों की आवाजाही का ध्यान क्यों नहीं रखा जाता? साथ ही, फ्लैटों में लकड़ी के लंबे समय तक चलने वाले काम और उससे जुड़ी सुरक्षा पर भी विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। यह घटना भविष्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि ऊंची इमारतों में केवल उपकरण होना काफी नहीं, बल्कि उन तक पहुंच होना भी अनिवार्य है।


