श्मशान में रोती भतीजी को देख पिघला अखिलेश का दिल, जमीन पर बैठ दुलारा, छलक उठीं सबकी आंखें

Uttar Pradesh News: लखनऊ का भैंसाकुंड घाट गुरुवार को एक बेहद भावुक दृश्य का गवाह बना। समाजवादी पार्टी के संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार भारी मन से किया गया। इस दौरान श्मशान घाट पर राजनीति पूरी तरह से पीछे छूट गई। वहां केवल एक परिवार का गहरा दुख और अपनों को खोने की चीखें मौजूद थीं। इस गमगीन माहौल ने वहां मौजूद हर एक शख्स की आंखों को नम कर दिया।

पिता की चिता देख छलक पड़े मासूम बेटियों के आंसू

भैंसाकुंड घाट पर जब मंत्रोच्चार के बीच प्रतीक यादव की चिता को मुखाग्नि दी गई, तो सबका रूह कांप उठा। इस दुखद माहौल में सभी की नजरें प्रतीक यादव की दो मासूम बेटियों पर टिकी थीं। अपनी दुनिया को राख में बदलते देखकर इन बच्चियों की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। बड़ी बेटी अपनी मां को संभालने की पूरी कोशिश कर रही थी। लेकिन वह खुद भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रही थी।

छोटी बेटी का डर और बेचैनी देख भर आया सबका कलेजा

पिता को खोने का दर्द छोटी बेटी के चेहरे पर साफ झलक रहा था। उसकी बेचैनी और डर वहां मौजूद हर इंसान का कलेजा चीर रहा था। वह मासूम बच्ची शायद अब भी इसी उम्मीद में थी कि उसके पापा उठेंगे और उसे गोद में उठा लेंगे। इस हृदयविदारक दृश्य ने घाट पर खड़े हर व्यक्ति को पूरी तरह झकझोर दिया। किसी के पास उस मासूम बच्ची को चुप कराने के लिए कोई शब्द नहीं थे।

राजनीति भूलकर ‘बड़े पापा’ की भूमिका में नजर आए अखिलेश यादव

इस भारी दुख के बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक बिल्कुल अलग रूप देखने को मिला। अपनी राजनीतिक व्यस्तताओं को किनारे रखकर अखिलेश एक बड़े भाई और पिता की तरह नजर आए। जब उन्होंने अपनी छोटी भतीजी को डरा हुआ देखा, तो वह खुद को रोक नहीं पाए। अखिलेश सीधे उस मासूम बच्ची के पास जमीन पर बैठ गए। उन्होंने बड़े ही दुलार और प्यार के साथ अपनी सहमी हुई भतीजी के सिर पर हाथ फेरा।

चॉकलेट देकर कराया चुप, दिखी मुलायम सिंह यादव के संस्कारों की छाप

अखिलेश यादव ने अपनी जेब से एक चॉकलेट निकाली और प्यार से बच्ची के हाथ में रख दी। उन्होंने बच्ची का ध्यान भटकाने के लिए उससे काफी देर तक बात भी की। वहां मौजूद लोगों ने इस मार्मिक दृश्य को देखकर कहा कि यह नेताजी के संस्कारों की अमिट छाप है। अखिलेश ने जिस तरह अपनी भतीजी को दुलारा और परिवार के मुखिया की जिम्मेदारी निभाई, उसकी हर तरफ चर्चा है। बड़ा दिल रखना विरासत की निशानी है।

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