Delhi News: आज तक की एंकर अंजना ओम कश्यप और यूट्यूब पर पढ़ाने वाले शिक्षकों के बीच विवाद तेज हो गया है। पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर हुई बहस में दिए गए बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी। कई ऑनलाइन शिक्षकों ने इसे शिक्षा जगत का अपमान बताया है।
विवाद की शुरुआत एक लाइव डिबेट के बाद हुई। इसमें अंजना ओम कश्यप ने कुछ लोकप्रिय यूट्यूब शिक्षकों पर सवाल उठाए। उन्होंने लाइव शो में यूट्यूब पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को दो कौड़ी का कह दिया। इसके साथ ही उन्होंने इन शिक्षकों को बडा फ्रॉड भी बताया। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर बहत तेजी से वायरल हो रहा है। इसी बयान पर शिक्षकों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
ऑनलाइन शिक्षकों ने बयान पर जताई कड़ी नाराजगी
खान सर, अभिनय मैथ्स, सुमन मैम और डेनिश सर जैसे कई नाम सोशल मीडिया चर्चा में रहे। इन शिक्षकों का कहना है कि ऑनलाइन एजुकेशन ने लाखों छात्रों तक सस्ती और आसान पढ़ाई पहुंचाई है। उनका दावा है कि छोटे शहरों और गरीब परिवारों के बच्चों को इससे बड़ा लाभ मिला है।
शिक्षकों ने यह भी सवाल उठाया कि पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर बहस का केंद्र सिस्टम होना चाहिए था। उनके अनुसार, छात्रों की परेशानी, भर्ती परीक्षाओं में देरी और लीक मामलों पर जिम्मेदार संस्थाओं से जवाब मांगा जाना चाहिए। इसके बजाय ऑनलाइन शिक्षकों को निशाना बनाने से विवाद और बढ़ गया।
सोशल मीडिया पर मीडिया बनाम टीचर्स बहस तेज
वायरल क्लिप्स के बाद सोशल मीडिया पर छात्रों ने भी अपनी राय रखी। कई यूजर्स ने लिखा कि यूट्यूब शिक्षकों ने कोविड काल और उसके बाद पढ़ाई का बड़ा सहारा दिया। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा में गुणवत्ता और जवाबदेही पर बहस भी जरूरी है। इससे मुद्दा और बड़ा हो गया।
अंजना ओम कश्यप की ओर से यह तर्क भी सामने आया कि हर ऑनलाइन शिक्षक को निशाना बनाना मकसद नहीं था। सवाल उन क्रिएटर्स पर था, जो शिक्षा के साथ बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी खुद को निर्णायक विशेषज्ञ की तरह पेश करते हैं। यह सफाई भी विवाद को शांत नहीं कर पाई।
मेनस्ट्रीम मीडिया और डिजिटल एजुकेटर्स के बीच यह टकराव इसलिए भी अहम है, क्योंकि करोड़ों छात्र अब यूट्यूब से परीक्षा तैयारी करते हैं। सरकारी नौकरी, NEET, JEE, SSC और UPSC जैसी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कंटेंट बड़ा सहारा बन चुका है। ऐसे में शिक्षक समुदाय इस टिप्पणी को गंभीर मान रहा है।
इस पूरे मामले ने ऑनलाइन शिक्षा की ताकत और सीमाओं पर नई चर्चा शुरू कर दी है। एक तरफ डिजिटल शिक्षकों की पहुंच, मेहनत और कम फीस की बात हो रही है। दूसरी तरफ शिक्षा को व्यूज, ब्रांडिंग और ऑनलाइन लोकप्रियता से जोड़ने के खतरे भी उठाए जा रहे हैं। बहस अभी जारी है।
Author: Rashmi Sharma


