झारखंड हाई कोर्ट ने 28 साल पुराने डायन हत्या मामले में आरोपी को किया बाइज्जत बरी

- Advertisement -

Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट ने तीन दशक पुराने डायन हत्या के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बोकारो के एक व्यक्ति मनसू मांझी को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा से बरी कर दिया है। जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने साक्ष्यों के अभाव में यह फैसला सुनाया है।

क्या था 1996 का पूरा मामला

घटना दो सितंबर 1996 की है, जब बोकारो जिले के वंशिमली गांव में चांदमनी मांझियान की हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि मनसू मांझी और रघुनाथ मांझी ने उसे डायन समझकर टांगी और लाठी से हमला कर मौत के घाट उतार दिया। घटना से एक दिन पहले ही इसे लेकर पंचायत में काफी विवाद हुआ था, जो बाद में हिंसक हो गया।

- Advertisement -

निचली अदालत का फैसला और अपील

वर्ष 1999 में बोकारो की एक निचली अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर मनसू मांझी को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उसी मामले में दूसरे आरोपी रघुनाथ मांझी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। मनसू मांझी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद यह राहत मिली है।

गवाहों के बयान में मिले बड़े विरोधाभास

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास है। मुख्य गवाह रूपलाल मांझी ने स्वयं को प्रत्यक्षदर्शी बताया, लेकिन उसकी पत्नी बसंती देवी ने इसे झुठला दिया। बसंती देवी ने कहा कि वे शोर सुनकर मौके पर पहुंची थीं। इसके अलावा, हमला करने वाले हथियार के बयानों में भी पुलिस को भारी विसंगतियां मिलीं।

कानूनी सिद्धांतों के आधार पर मिली राहत

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी मामले में दो दृष्टिकोण हों, तो हमेशा आरोपी के पक्ष वाला नजरिया अपनाना चाहिए। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष अपराध को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। इस कारण से आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया है।

- Advertisement -

बड़ी खबरें

Topics

Related Articles