मनाली का यह भयानक सच देखकर आपके होश उड़ जाएंगे, जानिए खूबसूरत वादियों का काला रहस्य

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Himachal Pradesh News: पहाड़ों की रानी मनाली अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। लेकिन इन दिनों यहां कचरा प्रबंधन एक बड़ा संकट बन गया है। पर्यटन के व्यस्त मौसम में जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए हैं। इससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

शहर में प्रवेश करते ही पर्यटकों का स्वागत कूड़े और बदबू से होता है। वोल्वो बस स्टैंड और अस्पताल के पास हालात बहुत खराब हैं। मशहूर मॉल रोड की सुंदरता भी दागदार हो गई है। दीवारों पर थूक के निशान हैं और नगर परिषद की महंगी पेंटिंग बेकार साबित हो रही हैं।

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पवित्र धार्मिक स्थलों के आसपास का नजारा सबसे ज्यादा निराश करने वाला है। इन जगहों पर शराब की खाली बोतलें फैली रहती हैं। रोहतांग दर्रा और सोलंग नाला जैसी प्रमुख जगहें अब प्लास्टिक डंपिंग ग्राउंड बन चुकी हैं। हिमाचल में सिंगल यूज प्लास्टिक बैन होने के बावजूद इसका खूब इस्तेमाल हो रहा है।

बाढ़ का बढ़ रहा है गंभीर खतरा

पर्यटकों की लापरवाही इतनी बढ़ गई है कि पेड़ों के खोखले तनों में कचरा भरा जा रहा है। इस कूड़े की वजह से कई छोटे-बड़े नाले पूरी तरह जाम हो चुके हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले मॉनसून में यह लापरवाही मनाली के लिए बहुत बड़ी आपदा ला सकती है।

नालों में जमा प्लास्टिक पानी के प्राकृतिक बहाव को रोक रहा है। इससे शहर में जलभराव और अचानक बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार नगर परिषद के कई वार्डों में सफाई व्यवस्था ठप है। अक्सर दोपहर एक बजे तक सड़कों से कूड़ा नहीं उठाया जाता है।

डस्टबिन की भारी कमी से बिगड़े हालात

मनाली बस स्टैंड पर रोजाना हजारों पर्यटक आते हैं और उन्हें भारी गंदगी झेलनी पड़ती है। हैरानी की बात यह है कि मुख्य आकर्षण मॉल रोड पर केवल दो या तीन ही डस्टबिन मौजूद हैं। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि खुले में कचरा फेंकने से रोकने के लिए यहां तुरंत नए डस्टबिन लगाए जाएं।

हिडिंबा मंदिर और क्लब हाउस जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के रास्तों पर प्लास्टिक कचरा बिखरा है। प्रतिबंध के बावजूद कई दुकानदार खुलेआम प्लास्टिक में खाना परोस रहे हैं। पानी की बोतलों के विकल्प के रूप में एक रुपये वाले पानी के पाउच धड़ल्ले से बिक रहे हैं। यह पर्यावरण के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।

गोम्पा रोड इलाके में नालियां पूरी तरह से जाम हैं। दिल्ली से आए एक पर्यटक ने साथी यात्रियों से जिम्मेदारी से पेश आने की अपील की है। उनका कहना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो प्रकृति पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। इसके लिए सिर्फ सरकार को दोष देना सही नहीं होगा।

भविष्य में पर्यटकों को यहां बर्फ देखने के लिए तरसना पड़ सकता है। जनता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और नागरिक समझ दिखानी होगी। स्थानीय लोगों ने कचरा प्रबंधन सुधारने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आधारित रिवॉर्ड सिस्टम जैसी ठोस व्यवस्था लागू करने की तत्काल मांग की है।

Author: Sunita Gupta

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