Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित बंजार घाटी में एक भीषण सड़क हादसे ने कोहराम मचा दिया है। जलोड़ी जोत से पर्यटकों को लेकर लौट रही एक टेंपो ट्रैवलर बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। इस दर्दनाक दुर्घटना में 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 19 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वाहन में कुल 23 लोग सवार थे, जिनमें दिल्ली, राजस्थान और पंजाब के पर्यटक शामिल थे। पुलिस और स्थानीय बचाव दल ने रात भर चले ऑपरेशन के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया है।
ड्राइवर का बयान: “ब्रेक फेल हुए और फिर आंखों के सामने छा गया अंधेरा”
अस्पताल में भर्ती बस चालक लियाकत हुसैन ने हादसे के खौफनाक पलों को बयां किया है। लियाकत के अनुसार, जब बस उतराई की तरफ बढ़ रही थी, तभी अचानक ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया। उसने वाहन को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन ढलान अधिक होने के कारण बस पूरी तरह बेकाबू हो गई। ड्राइवर ने बताया कि कुछ सेकंड बाद ही बस सड़क से नीचे खाई में जा गिरी और वह पूरी तरह बेसुध हो गया। फिलहाल लियाकत जोनल अस्पताल कुल्लू में भर्ती है और खतरे से बाहर बताया जा रहा है।
3 घायलों की हालत नाजुक, पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किए गए मरीज
कुल्लू अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर हीरालाल ने घायलों की स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय अस्पताल में कुल 17 घायल लाए गए थे, जिनमें से तीन पर्यटकों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया है। शेष 14 मरीजों का इलाज कुल्लू में ही चल रहा है, जिनकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। इसके अलावा, दो अन्य घायलों का उपचार सिविल अस्पताल बंजार में जारी है। प्रशासन मृतकों के परिजनों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है।
पहाड़ों के खतरनाक सफर पर उठे सवाल, पुलिस कर रही तकनीकी जांच
कुल्लू प्रशासन ने इस हृदयविदारक हादसे की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक जांच में ब्रेक फेल होना ही दुर्घटना की मुख्य वजह नजर आ रही है, लेकिन पुलिस तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ले रही है। जलोड़ी जोत का मार्ग अपनी अत्यधिक ढलान और तीखे मोड़ों के लिए जाना जाता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ऐसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा बैरियर लगाए जाएं। पुलिस अधिकारियों ने पर्यटकों और चालकों से अपील की है कि वे पहाड़ी रास्तों पर वाहनों की नियमित जांच के बाद ही सफर शुरू करें।
बचाव अभियान में जुटे स्थानीय लोग और प्रशासन की तत्परता
हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर मची चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण देवदूत बनकर पहुंचे। अंधेरे और गहरी खाई की बाधाओं के बावजूद ग्रामीणों ने पुलिस के आने से पहले रेस्क्यू शुरू कर दिया था। इसके बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मोर्चा संभाला। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी सड़कों पर वाहन चलाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर बहस छेड़ दी है।

