सैटेलाइट अलर्ट के बावजूद सुलग रहे हैं जंगल: अप्रैल में 50% बढ़ी आग की घटनाएं, बेअसर साबित हो रही चेतावनी?

New Delhi News: भारत के जंगलों में आग लगने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, जबकि भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) लगातार सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए पूर्वानुमान जारी कर रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल अप्रैल महीने में पिछले वर्षों के मुकाबले आग लगने की घटनाओं में 50 प्रतिशत का भारी इजाफा हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि एफएसआइ हर दिन संभावित क्षेत्रों के लिए तीन दिन पहले ही अलर्ट मैसेज जारी कर रहा है, फिर भी जमीन पर हालात नहीं बदल रहे हैं।

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मंत्रालय ने जताई गहरी चिंता, राज्यों को बचाव के सख्त निर्देश

जंगलों में लगातार धधकती आग के बीच केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। मंत्रालय ने सभी राज्यों को वन क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर समय रहते उचित उपाय किए जाएं, तो इन घटनाओं को टाला जा सकता है। वर्तमान में मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र आग के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील (Sensitive) श्रेणी में बने हुए हैं।

अप्रैल महीने में 77 हजार से अधिक अलर्ट मैसेज किए गए जारी

एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, अकेले अप्रैल महीने में एफएसआइ ने राज्यों को संभावित आग से जुड़े 77,000 से अधिक अलर्ट मैसेज भेजे हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 14,000 अलर्ट मध्य प्रदेश को भेजे गए हैं। अप्रैल के अंतिम सप्ताह (21 से 28 अप्रैल) में ही 24,000 से अधिक चेतावनी संदेश जारी किए जा चुके हैं। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में जंगल में बड़ी आग लगने की 1,200 से अधिक घटनाएं आधिकारिक रूप से रिपोर्ट की गई हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती हैं।

क्या है अलर्ट मैसेज सिस्टम और कैसे करता है यह काम?

वन क्षेत्रों को आग से बचाने के लिए विकसित किया गया यह अलर्ट मैसेज सिस्टम पूरी तरह सैटेलाइट इमेज पर आधारित है। एफएसआइ सैटेलाइट से प्राप्त डेटा का विश्लेषण कर संभावित क्षेत्रों की पहचान करता है और संबंधित वन अधिकारियों के मोबाइल पर तुरंत मैसेज भेजता है। इन संदेशों में आग लगने वाले सटीक वनक्षेत्र की लोकेशन भी शामिल होती है, ताकि वन विभाग की टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच सके। तकनीक की सुलभता के बावजूद धरातल पर आग पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

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संवेदनशील राज्यों में स्थिति बेकाबू, अधिकारियों की बढ़ी परेशानी

उत्तराखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में वनों की आग ने जैव विविधता के साथ-साथ पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। एफएसआइ द्वारा जारी अलर्ट मैसेज अगले तीन दिनों तक के लिए प्रभावी होते हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन को तैयारी का पर्याप्त समय मिलता है। हालांकि, संसाधनों की कमी या दुर्गम क्षेत्रों के कारण आग लगने की घटनाओं को पूरी तरह रोकने में मुश्किलें आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अलर्ट ही काफी नहीं है, बल्कि वन विभाग के पास आधुनिक अग्निशमन उपकरण होना भी अनिवार्य है।

बढ़ता तापमान और मानवीय लापरवाही बनी बड़ी वजह

जंगलों में आग लगने का एक मुख्य कारण बढ़ता वैश्विक तापमान और गर्मी का प्रकोप है। इसके साथ ही कई बार मानवीय लापरवाही या स्थानीय स्तर पर लगाई गई आग भी विकराल रूप ले लेती है। सैटेलाइट अलर्ट सिस्टम होने के बावजूद अप्रैल में 50 प्रतिशत अधिक घटनाएं होना वन प्रबंधन की कार्यक्षमता पर सवालिया निशान लगाता है। मंत्रालय अब इस बात की समीक्षा कर रहा है कि अलर्ट मिलने के बाद राज्यों की ओर से क्या त्वरित कार्रवाई की गई और विफलताओं के पीछे मुख्य कारण क्या रहे।

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