क्या सच में जड़ी-बूटियों से मिट सकता है कैंसर? बैतूल के कान्हावाड़ी में उमड़ रही हजारों मरीजों की भीड़

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले का एक छोटा सा गांव कान्हावाड़ी इन दिनों देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि यहां जंगलों से मिली दुर्लभ जड़ी-बूटियों के जरिए कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी का सफल इलाज किया जा रहा है। घोड़ाडोंगरी ब्लॉक स्थित इस गांव में ‘भगत बाबूलाल’ के नाम से मशहूर एक वैद्य पिछले कई वर्षों से मरीजों का निशुल्क उपचार कर रहे हैं। यहां दिल्ली, मुंबई और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से भी लोग असाध्य रोगों से मुक्ति की आस लेकर पहुंच रहे हैं।

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निशुल्क इलाज और जड़ी-बूटियों का चमत्कार

बैतूल का सतपुड़ा क्षेत्र अपनी घनी हरियाली के साथ-साथ अब आयुर्वेद के लिए भी पहचाना जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार भगत बाबूलाल पारंपरिक औषधियों और जड़ी-बूटियों के माध्यम से कैंसर पीड़ितों की सेवा में जुटे हैं। सबसे विशेष बात यह है कि वह इस नेक कार्य के बदले में मरीजों से एक रुपया भी नहीं लेते हैं। उनकी ख्याति इतनी बढ़ चुकी है कि देश-विदेश से लोग नाड़ी दिखाकर अपना मर्ज जानने और आयुर्वेदिक उपचार लेने के लिए यहां खिंचे चले आते हैं।

नंबर लगाने के लिए रात भर करना पड़ता है इंतजार

कान्हावाड़ी में हर रविवार और मंगलवार को मरीजों का ताता लगा रहता है। भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि लोगों को अपनी बारी के लिए एक दिन पहले ही रात में गांव पहुंचना पड़ता है। प्रतिदिन करीब 1000 से अधिक मरीज यहां स्वास्थ्य लाभ लेने पहुंचते हैं। खासकर महाराष्ट्र से आने वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा होती है। सुबह से लेकर शाम तक वैद्य खड़े रहकर सभी मरीजों की नाड़ी देखते हैं और उन्हें जड़ी-बूटियों से बनी दवाइयां प्रदान करते हैं।

कड़े परहेज के बिना बेअसर है दवा

आयुर्वेदिक उपचार के दौरान नियमों का पालन करना सबसे अनिवार्य शर्त है। भगत बाबूलाल के अनुसार जड़ी-बूटियां तभी असर करती हैं जब मरीज खान-पान का कड़ाई से ध्यान रखे। इलाज के दौरान मांस, मदिरा और कुछ विशेष प्रकार की सब्जियों का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। मरीजों का दावा है कि जिन्होंने इन नियमों का पालन करते हुए नियमित रूप से दवाओं का सेवन किया है, उन्हें गंभीर बीमारियों से काफी हद तक राहत मिली है और स्वास्थ्य में सुधार हुआ है।

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सटीक लोकेशन और मिलने का समय

यदि आप कान्हावाड़ी पहुंचना चाहते हैं तो यह बैतूल जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर है। सबसे पहले आपको घोड़ाडोंगरी पहुंचना होगा, जहां से कान्हावाड़ी गांव की दूरी मात्र 3 किलोमीटर है। यहां मिलने का समय मंगलवार और रविवार को सुबह 8 बजे से है। हालांकि भारी भीड़ के कारण मरीजों को पहले ही टोकन या नंबर हासिल करने की सलाह दी जाती है। प्रशासन भी सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए समय-समय पर यहां नजर रखता है।

विज्ञान और विश्वास के बीच का सेतु

आज की आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के बीच कान्हावाड़ी की यह पद्धति आयुर्वेद और लोक विश्वास का संगम पेश करती है। हालांकि डॉक्टर हमेशा विशेषज्ञ की सलाह लेने की बात कहते हैं, लेकिन यहां आने वाले हजारों लोगों का अटूट विश्वास कुछ अलग ही कहानी कहता है। नाड़ी पकड़कर मर्ज बताने की कला ने भगत बाबूलाल को इस क्षेत्र में एक सिद्धहस्त वैद्य के रूप में स्थापित कर दिया है। मानवता की सेवा का यह सिलसिला सालों से बिना किसी विज्ञापन के लगातार जारी है।

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