Himachal Pradesh News: केंद्र सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में पहली बार छह वीर सैनिकों के नामों की सूची सार्वजनिक की है। इस गौरवशाली सूची में हिमाचल प्रदेश के शाहपुर के रहने वाले बलिदानी सूबेदार पवन कुमार जरयाल का नाम पहले स्थान पर है। अब उनका नाम दिल्ली के राष्ट्रीय समर स्मारक के त्याग चक्र में हमेशा के लिए सुनहरे अक्षरों में चमकेगा
इस ऐतिहासिक और सम्मानजनक घोषणा के बाद बलिदानी सूबेदार पवन कुमार के पैतृक घर सिहोलपुरी में गर्व और दुख का माहौल है। उनकी पत्नी वीरनारी सुषमा जरयाल ने इस भावुक क्षण पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि घायल होने की खबर सुनकर ही हमने तय कर लिया था कि पति सुरक्षित लौटे तो हमारे, नहीं तो देश के हो जाएंगे।
वीरनारी सुषमा जरयाल ने सेना में भेजने का दिया आशीर्वाद
वीरनारी सुषमा ने कहा कि जीवन साथी को खोने का दर्द बहुत गहरा होता है। मगर अब उन्हें इस बात का पूरा संतोष है कि उनके पति का नाम देश के महानतम वीरों के साथ जुड़ गया है। उन्होंने घोषणा की कि यदि उनके बच्चे भविष्य में भारतीय सेना में जाना चाहेंगे, तो वह उन्हें पूरा आशीर्वाद और अपनी सहमति देंगी।
शहीद के पिता पूर्व हवलदार गरज सिंह भी अपने लाडले बेटे की इस बड़ी उपलब्धि से बेहद गौरवान्वित हैं। उन्होंने कहा कि पवन देश की रक्षा करते हुए हमेशा के लिए अमर हो गया है। वह अपने खुद के सैन्य जीवन में जो गौरव हासिल नहीं कर पाए, उसे उनके बहादुर बेटे ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर सच कर दिखाया।
पाकिस्तानी गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब देते हुए हुए थे शहीद
बलिदानी सूबेदार पवन कुमार की बेटी अनामिका ने कहा कि उनके पिताजी के सर्वोच्च बलिदान के कारण ही आज समाज में उनका नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है। वहीं मां किशो देवी सहित पूरा परिवार कहता है कि राष्ट्रीय समर स्मारक में नाम अंकित होना हिमाचल प्रदेश के सभी वीर सैनिक परिवारों के लिए एक बड़ा सम्मान है।
भारतीय सेना की 25 पंजाब रेजिमेंट के सूबेदार पवन कुमार जरयाल 9 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब देते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। वह 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले थे। उन्होंने अपनी अंतिम सैन्य तैनाती के रूप में स्वेच्छा से जम्मू-कश्मीर के इस बेहद संवेदनशील ऑपरेशन क्षेत्र को चुना था।

