Health News: खून की उल्टी होना या अचानक मल का रंग गहरा काला हो जाना बेहद डरावना अनुभव हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान में इस गंभीर स्थिति को मैलोरी-वीस टियर (Mallory-Weiss Tear) कहा जाता है। यह भोजन नली के निचले हिस्से में आने वाला एक दर्दनाक चीरा है।
वरिष्ठ पेट रोग विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या आमतौर पर बहुत तेज उल्टी होने, लगातार उबकाई आने, गंभीर खांसी या पेट पर अत्यधिक जोर पड़ने के कारण होती है। इस अंदरूनी चीरे की वजह से ब्लीडिंग शुरू हो जाती है, जिससे शरीर में अचानक भारी कमजोरी और चक्कर आने लगते हैं।
इस बीमारी का नाम सुनते ही मरीजों के मन में सबसे पहला डर सर्जरी और ऑपरेशन को लेकर बैठ जाता है। इसी महत्वपूर्ण विषय पर सही और सटीक जानकारी के लिए हमने हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स की कंसल्टेंट सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉक्टर कोना लक्ष्मी कुमारी से विशेष बातचीत की है।
बिना ऑपरेशन ठीक हो जाते हैं 90% मामले
डॉक्टर कोना लक्ष्मी कुमारी ने मरीजों को बड़ी राहत देते हुए बताया कि मैलोरी-वीस टियर के लगभग 80 से 90 प्रतिशत मामले बिना किसी सर्जरी के पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। अधिकांश मरीजों में अंदरूनी ब्लीडिंग कुछ समय बाद अपने आप ही रुक जाती है और स्थिति नियंत्रण में आ जाती है।
शुरुआती इलाज के दौरान सबसे पहले मरीज की शारीरिक स्थिति को स्थिर किया जाता है। शरीर में पानी और जरूरी तरल पदार्थों की कमी को पूरा करने के लिए ड्रिप लगाई जाती है। इसके साथ ही पेट के एसिड को कम करने वाली विशेष दवाएं दी जाती हैं, जिससे घाव तेजी से भरता है।
एंडोस्कोपी तकनीक से रुक जाती है ब्लीडिंग
यदि मरीज के पेट से ब्लीडिंग ज्यादा हो रही हो या वह अपने आप बंद नहीं हो रही हो, तो विशेषज्ञ तुरंत अपर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी की सलाह देते हैं। एंडोस्कोपी के जरिए डॉक्टर बिना कोई चीर-फाड़ किए, मुंह के रास्ते कैमरे की मदद से सीधे प्रभावित हिस्से तक पहुंचते हैं।
आधुनिक चिकित्सा में क्लिपिंग, बैंड लिगेशन, इंजेक्शन थेरेपी और थर्मल कोएगुलेशन जैसी बेहद उन्नत एंडोस्कोपिक तकनीकें मौजूद हैं। इनके जरिए एक्टिव ब्लीडिंग को तुरंत और बेहद प्रभावी तरीके से रोका जा सकता है। यह आधुनिक प्रक्रिया मरीज को किसी भी बड़े ऑपरेशन के खतरे से बचा लेती है।
बेहद दुर्लभ मामलों में ही होती है सर्जरी
डॉक्टर लक्ष्मी कुमारी के अनुसार, इस बीमारी में ओपन या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की जरूरत केवल बहुत ही दुर्लभ और आपातकालीन परिस्थितियों में पड़ती है। जब एंडोस्कोपी और तमाम आधुनिक दवाओं के बाद भी खून का बहना बंद न हो, सिर्फ तभी डॉक्टर आखिरी विकल्प के रूप में सर्जरी चुनते हैं।
विशेषज्ञों ने अंत में बेहद जरूरी सलाह देते हुए कहा कि अगर आपको खून की उल्टी हो, मल का रंग काला दिखे या पेट में लगातार असहजता के साथ चक्कर आ रहे हों, तो इसे सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि समय पर ब्लीडिंग रुकना ही जीवन की सुरक्षा है।
Author: Asha Thakur


