Entertainment News: ‘चलो दिलदार चलो…’ यह गाना सुनते ही फिल्म पाकीजा याद आ जाती है। 1972 में रिलीज हुई इस क्लासिक फिल्म को बनने में 14 से 15 साल लग गए। लेकिन क्या आपने गौर किया है कि इस गाने में मीना कुमारी का चेहरा नहीं दिखता? इसके पीछे एक दिल दहला देने वाली वजह थी। आइए जानते हैं पूरी कहानी।
फिल्म बनते-बनते बदल गई मीना कुमारी की सेहत
कमाल अमरोही और मीना कुमारी ने 1952 में शादी की थी। 1956 में उन्होंने पाकीजा बनानी शुरू कर दी। उस वक्त मीना महज 19 साल की थीं और बेहद खूबसूरत थीं। शुरुआती गाने ‘इन्हीं लोगों ने ले लीन्हा दुपट्टा मेरा’ की शूटिंग आसानी से हो गई। लेकिन फिर फिल्म की शूटिंग में एक के बाद एक मुश्किलें आती गईं। ब्लैक एंड व्हाइट में बन रही फिल्म को बीच में कलर में बदलना पड़ा।
टूटते रिश्ते और बिगड़ती सेहत ने बढ़ाई मुश्किल
पाकीजा बनते-बनते मीना कुमारी और कमाल अमरोही के रिश्ते में कड़वाहट आ गई। इस वजह से फिल्म को बीच में बंद भी कर दिया गया। 1969 में मीना को मनाकर दोबारा शूटिंग शुरू हुई। लेकिन तब तक शराब की लत ने मीना को बीमार बना दिया था। उन्हें लिवर सिरोसिस हो चुका था। उनकी आवाज तक बदल गई थी। यहां तक कि लता मंगेशकर की आवाज में भी फर्क महसूस किया जा सकता है।
‘चलो दिलदार चलो’ के शूट के समय मीना बेहाल थीं
जब ‘चलो दिलदार चलो’ गाने की बारी आई, तो मीना कुमारी की हालत बेहद खराब थी। वह शूटिंग नहीं कर पा रही थीं। इस गाने में राज कुमार के साथ मीना का अहम रोल था। लेकिन मीना की बीमारी के कारण कमाल अमरोही ने गाने को ऐसे शूट करने का फैसला किया जिससे उनका चेहरा न दिखे। उन्होंने बॉडी डबल का इस्तेमाल किया।
गाने में दिखती हैं मीना की पीठ और दुपट्टा
इस गाने में दर्शकों को मीना कुमारी की पीठ, पानी, वादियां, सितारे, दूर से चलती नाव और पानी की लहरें दिखती हैं। जब राज कुमार के साथ मीना का शॉट है, तो वह सिर पर दुपट्टा ओढ़े हुई हैं। उनकी पीठ की तरफ से ही शूटिंग की गई है। फिल्म के इस गाने को देखकर आज भी लोगों को मीना कुमारी की तकलीफ का अंदाजा हो जाता है। पाकीजा उनकी आखिरी बड़ी फिल्मों में से एक थी।

