सोलन में सनसनी: नालागढ़ जेल की दीवार फांदने की फिराक में थे हथियारबंद बदमाश, पिस्टल और नशे के साथ दो गिरफ्तार

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में जेल की सुरक्षा में सेंध लगाने की एक बड़ी और खतरनाक साजिश नाकाम हुई है। नालागढ़ के किशनपुरा उप-कारागार की दीवार के पास पुलिस ने दो संदिग्धों को दबोचा है। इनके पास से एक अवैध पिस्टल, जर्दा और नशीले पदार्थों की खेप बरामद की गई है। आरोपित जेल के अंदर बंद कैदियों तक यह प्रतिबंधित सामान पहुंचाने की फिराक में थे। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों को हिरासत में ले लिया है।

जेल वार्डर की सतर्कता से टला बड़ा खतरा

यह घटना नालागढ़ क्षेत्र के मानपुरा थाना के अंतर्गत आने वाली किशनपुरा उप-कारागार की है। 14 अप्रैल को जेल की बाहरी सुरक्षा दीवार के पास तैनात वार्डर ने दो संदिग्ध व्यक्तियों को घूमते देखा। संदिग्धों की गतिविधियां देख जेल स्टाफ ने उन्हें तुरंत पकड़ने की कोशिश की। हालांकि, उस समय एक आरोपित चकमा देकर फरार हो गया था। पुलिस ने जेल वार्डर की शिकायत पर तुरंत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और सुरक्षा बढ़ा दी।

पकड़े गए आरोपितों के पास से पिस्टल और नशा बरामद

तलाशी के दौरान पहले पकड़े गए आरोपित के पास से एक लोडेड अवैध पिस्टल मिली है। इसके अलावा उसके पास जर्दा और बीड़ी के कई पैकेट भी बरामद हुए हैं। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये लोग दीवार के ऊपर से सामान जेल के भीतर फेंकने वाले थे। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता की बात यह है कि जेल परिसर के पास हथियारबंद बदमाशों की मौजूदगी किसी बड़ी आपराधिक साजिश की ओर इशारा करती है।

पुलिस ने दोनों आरोपितों को किया गिरफ्तार

पकड़े गए पहले आरोपित की पहचान नालागढ़ निवासी नन्द लाल उर्फ नंदू के रूप में हुई है। वहीं, फरार होने वाले दूसरे आरोपित निर्मल उर्फ काकू को पुलिस ने अगले दिन एक विशेष अभियान चलाकर गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपित स्थानीय गांवों के रहने वाले हैं। पुलिस अब उनसे यह उगलवाने की कोशिश कर रही है कि वे जेल में किसके लिए यह सामान ले जा रहे थे। दोनों से गुप्त स्थान पर पूछताछ जारी है।

जेल के भीतर किसी बड़े नेटवर्क की आशंका

पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी मामले की स्वयं निगरानी कर रहे हैं। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या जेल के भीतर कोई बड़ा अपराधी गिरोह सक्रिय है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि पिस्टल और नशा इन आरोपितों तक किसने पहुंचाया। क्या यह किसी कैदी को जेल से भगाने या किसी वारदात को अंजाम देने की तैयारी थी? इन सवालों के जवाब ढूंढने के लिए आरोपितों के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स भी खंगाले जा रहे हैं।

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