आधी रात को बिछाया जाल, तिरपाल हटाते ही उड़े होश! हिमाचल में 10 गाड़ियों से मिला लकड़ी का महाजखीरा

Himachal Pradesh News: देवभूमि की बेशकीमती वन संपदा को लूटने वाले वन माफिया के खिलाफ वन विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है। रात के सन्नाटे में तस्करी के इरादे से निकले माफिया के मंसूबों को वन विभाग की विशेष टीमों ने पूरी तरह नाकाम कर दिया है।

अधिकारियों ने पूरी रात एक बेहद गोपनीय और सघन सर्च ऑपरेशन चलाया। इस बड़े ऑपरेशन के दौरान विभाग ने लकड़ी से लदे 10 संदिग्ध वाहनों को रंगे हाथ दबोच लिया है। इन सभी गाड़ियों में पूरी तरह प्रतिबंधित प्रजातियों की कीमती लकड़ियां अवैध रूप से ले जाई जा रही थीं।

तिरपाल के पीछे छिपा था तस्करी का बड़ा खेल

शातिर वन माफिया ने पुलिस और वन विभाग की टीम को चकमा देने के लिए एक नया पैंतरा आजमाया था। उन्होंने सभी 10 वाहनों को ऊपर से नीले रंग की तिरपाल से पूरी तरह ढक रखा था। सड़क पर दौड़ती इन गाड़ियों को देखकर पहली नजर में ऐसा लग रहा था मानो कोई सामान्य सामान जा रहा हो।

जब वन विभाग की टीम ने घेराबंदी करके इन सभी वाहनों को रुकवाया और तिरपाल हटाकर देखा तो अधिकारियों के होश उड़ गए। गाड़ियों के भीतर प्रतिबंधित हरी और कीमती लकड़ियों का भारी जखीरा भरा हुआ था। तस्करों की यह चालाकी अधिकारियों की सतर्कता के आगे धरी की धरी रह गई।

गुप्त सूचना पर रेंज ऑफिसर ने की नाकाबंदी

वन परिक्षेत्र अधिकारी अम्ब राहुल ठाकुर ने बताया कि विभाग को इस तस्करी की गुप्त सूचना पहले ही मिल चुकी थी। इसके बाद वन मंडल अधिकारी ऊना विकल्प यादव के सख्त निर्देश पर एक त्वरित और विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम ने रात 1 बजे से ही मोर्चा संभाल लिया था।

विशेष टीम ने सुबह 8 बजे तक अम्ब और भरवाईं रेंज में हर आने-जाने वाले संदिग्ध वाहन की बारीकी से सघन तलाशी ली। इस कड़ी नाकाबंदी के दौरान भरवाईं रेंज की टीम ने देहरा डिवीजन की तरफ से आ रहे 2 वाहनों को पकड़ा, जबकि अम्ब रेंज में 8 गाड़ियां दबोची गईं।

बरामद हुई प्रतिबंधित कैम्बल और सिम्बल की लकड़ियां

वन विभाग की प्रारंभिक जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि पकड़े गए लगभग सभी वाहनों में प्रतिबंधित कैम्बल और सिम्बल जैसी चौड़ी पत्ती वाली प्रजातियों की लकड़ियां भरी हुई थीं। इसके अलावा एक गाड़ी में भारी मात्रा में आम की हरी लकड़ी भी लोड पाई गई है।

कार्रवाई के दौरान किसी भी वाहन चालक के पास लकड़ी के परिवहन से जुड़ा कोई भी वैध परमिट या आधिकारिक दस्तावेज नहीं मिला। बिना कागजात के कीमती लकड़ियों को राज्य की सीमा से बाहर ले जाने की पूरी तैयारी थी, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया।

माफिया के आकाओं पर कसेगा कानूनी शिकंजा

डीएफओ ऊना विकल्प यादव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी 10 वाहनों को तुरंत जब्त कर लिया है। वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम, 1927 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की तफ्तीश बेहद तेज कर दी है। विभाग अब इस पूरे मामले की बैकवर्ड इन्वैस्टिगेशन कर रहा है।

अधिकारी अब इस बात का पता लगा रहे हैं कि यह लकड़ी किसी निजी भूमि से काटी गई है या फिर सरकारी जंगलों को नुकसान पहुंचाया गया है। डीएफओ ने साफ कहा है कि इस पूरे सिंडिकेट के पीछे छिपे मुख्य आकाओं की पहचान कर उन पर सख्त कानूनी चाबुक चलाया जाएगा।

Author: Sunita Gupta

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