Madhya Pradesh News: भोपाल के बहुचर्चित ट्वीशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में नया मोड़ आ गया है। मृतका की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इसके साथ ही उन्होंने बहू की मौत पर कई हैरान करने वाले खुलासे किए हैं।
प्रेग्नेंसी रोकने की चाहत और अधूरा रह गया सपना
गिरिबाला सिंह ने बताया कि ट्वीशा ने अपनी मर्जी से प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन यानी एमटीपी की प्रक्रिया शुरू की थी। पहला कोर्स पूरा होने के बाद वह इसे रोकना चाहती थी। वह अपने फैसले को बदलना चाहती थी लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। यह हमारे पूरे परिवार के लिए एक बहुत बड़ा झटका था।
उन्होंने बताया कि सात मई को ट्वीशा की एमटीपी प्रक्रिया पूरी हुई थी। इस मुश्किल वक्त में परिवार को उसका साथ देना पड़ा। सास ने यह भी दावा किया कि उन्होंने ट्वीशा की मां को फोन करके बेटी के पास रहने को कहा था। आरोप है कि पिछले पांच महीनों से उसके माता-पिता मिलने नहीं आए।
मानसिक स्वास्थ्य की समस्या और इलाज के गंभीर साइड इफेक्ट
सास गिरिबाला ने अपनी बहू की मानसिक स्थिति पर भी बड़ी बात कही। उनके मुताबिक ट्वीशा काफी समय से साइकेट्रिक काउंसलिंग ले रही थी। उसे सिज़ोफ्रेनिया के मरीजों को दी जाने वाली भारी दवाइयां दी जा रही थीं। दवाइयों की वजह से उसके हाथों में कंपन जैसे गंभीर विथड्रॉल सिम्पटम्स भी अक्सर दिखाई देते थे।
रिटायर्ड जज ने बताया कि वह ऑफिस से आकर अपनी बहू का बहुत ख्याल रखती थीं। वह कुछ दिन सामान्य रहती थी लेकिन फिर बर्ताव बदल जाता था। इस घटना ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। उन्होंने मायके वालों से अपील की है कि वे विरोध प्रदर्शन भले करें लेकिन बेटी का अंतिम संस्कार जरूर कर दें।
Author: Vijay Chouhan


