Kangra News: हिमाचल प्रदेश के ज्वालामुखी में समाजसेवी मुकेश कुमार के साथ हुई मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना सात जुलाई की बताई जा रही है। पीड़ित ने स्वयं इस फुटेज को इंटरनेट पर अपलोड किया है। इस मामले में पुलिस प्रशासन की ढीली कार्रवाई को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि पीड़ित मुकेश कुमार जब मंदिर अधिकारी के कार्यालय में प्रवेश करते हैं, तो वहां पहले से तैनात होमगार्ड के जवान उन्हें देख रहे थे। हैरान करने वाली बात यह है कि उस स्थान पर इन जवानों की नियमित ड्यूटी भी नहीं थी। यह सभी जवान मारपीट खत्म होने तक वहीं मुस्तैद खड़े रहे।
ज्वालामुखी मंदिर अधिकारी के कार्यालय में सुनियोजित हमला
वीडियो के अनुसार मुकेश कुमार के भीतर जाते ही स्थानीय विधायक का निजी ड्राइवर सीधे कार्यालय की तरफ आता है। इसके तुरंत बाद एक ठेकेदार और उसका बेटा भी दौड़ते हुए कमरे में दाखिल होते हैं। पीड़ित का आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर बंद कमरे के अंदर करीब 20 मिनट तक उनके साथ बेरहमी से मारपीट की।
इस पूरे घटनाक्रम को एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा माना जा रहा है। जैसे ही हमलावर मारपीट कर कार्यालय से बाहर निकलते हैं, ठीक उसी समय वहां दो पुलिस कर्मचारी भी पहुंच जाते हैं। वारदात के तुरंत बाद पुलिसकर्मियों का वहां आना कई गंभीर सवालों को जन्म दे रहा है कि वे वहां ड्यूटी पर थे या सिर्फ घूम रहे थे।
पांच दिन बाद भी प्राथमिकी दर्ज न होने पर आक्रोश
हैरानी की बात यह है कि घटना के पांच दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया है। मामले में अभी तक प्राथमिकी भी दर्ज नहीं की गई है, जिससे जांच अटकी हुई है। पीड़ित पर हुआ यह जानलेवा हमला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया प्रतीत होता है।
समाजसेवी मुकेश कुमार ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि सच्चाई को छुपाया नहीं जा सकता। उन्होंने अपनी शिकायत में अप्पू शर्मा, अश्विनी शर्मा और आकाश शर्मा को नामजद किया है। मुकेश कुमार ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है ताकि दोषियों को सजा मिल सके।
पीड़ित ने सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उन्हें या उनके परिवार को कोई नुकसान पहुंचता है, तो शिकायत में दर्ज लोग ही जिम्मेदार होंगे। मुकेश कुमार ने साफ किया कि वे जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाना बंद नहीं करेंगे और अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेंगे।

