रोहतास की सुधा सिंह ने तीसरे प्रयास में लहराया परचम, बनीं अपने गांव की पहली महिला SDM

Rohtas News: बिहार के रोहतास जिले की रहने वाली सुधा सिंह ने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। सुधा का चयन सीधे सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के प्रतिष्ठित पद पर हुआ है।

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सुधा सिंह रोहतास जिले के दिनारा ब्लॉक अंतर्गत धरहरा गांव की निवासी हैं। उनके पिता जगनारायण सिंह अपनी बेटी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से बेहद गौरवान्वित हैं। सुधा की इस सफलता से न केवल उनके परिवार में बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी और जश्न का माहौल बना हुआ है।

रांची से दिल्ली तक का कड़ा संघर्ष

सुधा सिंह की शुरुआती स्कूली शिक्षा रांची के एक सरकारी विद्यालय से हुई, क्योंकि उनके पिता वहां नौकरी करते थे। इसके बाद उन्होंने बिहार वापस आकर वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी से वर्ष 2018 में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद वे सिविल सेवा की तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं।

दिल्ली पहुंचकर सुधा ने सबसे पहले संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की थी। उन्होंने देश की इस सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में दो बार अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन दोनों ही प्रयासों में उन्हें असफलता हाथ लगी। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान राज्य लोक सेवा आयोग की तरफ केंद्रित कर लिया।

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बड़े भाई की प्रेरणा से पूरा हुआ सपना

सुधा सिंह बताती हैं कि उन्हें प्रशासनिक सेवा में आने की मुख्य प्रेरणा अपने बड़े भाई से मिली थी। उनके बड़े भाई का यह सपना था कि सुधा एक दिन प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश और समाज की सेवा करें। मुश्किल दौर में भी उनके भाई ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया और हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया।

बीपीएससी परीक्षा को पास करने के लिए सुधा को करीब चार वर्षों तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा। प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले दो प्रयासों में असफल रहने और दूसरे अटेंप्ट में इंटरव्यू राउंड तक पहुंचकर बाहर होने के बाद, उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने पूरे राज्य में 167वीं रैंक हासिल कर अपना सपना सच कर दिखाया।

सीमित संसाधनों में बनीं लड़कियों के लिए मिसाल

नतीजे घोषित होने के बाद सुधा को उम्मीद थी कि उनका चयन किसी पद पर हो जाएगा, लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि उन्हें एसडीएम का पद मिला है, वह बेहद भावुक हो गईं। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही सुधा अपने पूरे गांव से एसडीएम का पद हासिल करने वाली पहली बेटी बन गई हैं।

सुधा सिंह का यह सफर देश और प्रदेश की लाखों उन लड़कियों के लिए एक महान प्रेरणास्रोत है, जो सीमित संसाधनों और सुविधाओं के बीच बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं। उनकी यह कामयाबी साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो किसी भी चुनौती को पार कर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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