Dehradun News: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए लाखों छात्र सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। लेकिन कुछ असाधारण प्रतिभाएं ऐसी होती हैं, जो इस परीक्षा को एक नहीं बल्कि दो बार पास कर देश में मिसाल कायम करती हैं।
उत्तराखंड के देहरादून की रहने वाली डॉ. रीतिका आइमा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पेशे से एक क्वालिफाइड एमबीबीएस डॉक्टर होने के बावजूद, उन्होंने मेडिकल क्षेत्र को छोड़कर प्रशासनिक सेवा में आने का फैसला किया। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर लगातार दो बार यूपीएससी परीक्षा क्रैक की।
कोरोना महामारी के दौरान समझी प्रशासनिक सिस्टम की जरूरत
देहरादून से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद डॉ. रीतिका ने हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। रीतिका के पिता डॉ. रमेश आइमा खुद नागालैंड कैडर के एक सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी हैं। इस वजह से उन्हें बचपन से ही घर में प्रशासनिक माहौल मिला था।
अपनी मेडिकल की पढ़ाई के दौरान और कोरोना महामारी के कठिन दौर में जब उनकी ड्यूटी एक कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में लगी, तब उन्हें एक नई सीख मिली। उन्होंने महसूस किया कि एक डॉक्टर के तौर पर वे एक समय में केवल एक ही मरीज का इलाज कर सकती हैं। लेकिन व्यापक बदलाव के लिए प्रशासन का हिस्सा बनना जरूरी है।
उन्हें समझ आया कि देश के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी अस्पतालों, दवाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी व्यापक नीतियों को अगर बेहतर बनाना है, तो प्रशासनिक सुधार आवश्यक हैं। इसी सामाजिक सोच और लोक कल्याण के विचार ने उन्हें यूपीएससी की कठिन तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।
IPS की नौकरी मिलने के बाद भी जारी रखी IAS बनने की जिद
रीतिका ने एंथ्रोपोलॉजी को अपना वैकल्पिक विषय चुना और बिना समय गंवाए कड़ी मेहनत शुरू कर दी। उनकी लगन रंग लाई और उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2022 में ऑल इंडिया 186वीं रैंक हासिल की। इस शानदार रैंक के आधार पर उनका चयन प्रतिष्ठित भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए किया गया।
आमतौर पर लोग आईपीएस बनने के बाद संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन रीतिका का सपना हमेशा से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाने का था। वे सीधे नीति निर्धारण का हिस्सा बनना चाहती थीं। नौकरी की व्यस्तता के साथ उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और रणनीति को और ज्यादा मजबूत किया।
अगले ही साल सिविल सेवा परीक्षा 2023 में उन्होंने शानदार सफलता पाते हुए ऑल इंडिया 33वीं रैंक हासिल कर ली। उन्होंने मेन्स परीक्षा में 804 और इंटरव्यू में 212 अंकों के साथ कुल 1016 अंक हासिल किए। वर्तमान में वे गुजरात कैडर के तापी जिले में सुपरन्यूमरेरी असिस्टेंट कलेक्टर हैं।
सिविल सेवा के अभ्यर्थियों के लिए ‘प्लान-बी’ की खास सलाह
डॉ. रीतिका सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं। वे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए सिविल सेवा के नए उम्मीदवारों को तैयारी, इंटरव्यू और स्ट्रेस मैनेजमेंट के बेहतरीन टिप्स देती हैं। युवाओं को सलाह देते हुए वे कहती हैं कि किसी भी परीक्षा का परिणाम आपकी वास्तविक काबिलियत तय नहीं कर सकता।
उनका दृढ़ता से मानना है कि यूपीएससी जैसी अत्यधिक अनिश्चित परीक्षा की तैयारी करते समय छात्रों को हमेशा अपने पास एक ठोस ‘प्लान-बी’ (बैकअप प्लान) जरूर रखना चाहिए। एक मजबूत बैकअप प्लान होने से छात्रों के दिमाग पर से अतिरिक्त मानसिक दबाव काफी कम हो जाता है।
मानसिक दबाव कम होने से अभ्यर्थी अधिक आत्मविश्वास और वैचारिक स्पष्टता के साथ मुख्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। रीतिका का यह सफर देश के उन तमाम युवाओं और कामकाजी प्रोफेशनल्स के लिए प्रेरणादायक है, जो असफलताओं से डरे बिना अपने बड़े लक्ष्यों को हासिल करना चाहते हैं।

