सोने की कीमतों में भारी गिरावट के बाद भी भारतीय बाजार में मांग घटी, ग्राहक लगातार टाल रहे हैं खरीदारी

- Advertisement -

Mumbai News: भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट के बाद भी खरीदार बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं। सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने और भविष्य में और मंदी आने की आशंका से लोग नया सोना खरीदने से बच रहे हैं। इस वजह से घरेलू बाजार में रिटेल डिमांड काफी कमजोर हो गई है।

कस्टम ड्यूटी बढ़ने से बाजार की मांग सत्तर प्रतिशत घटी

इंडिया बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन के अनुसार पिछले दिनों टैक्स बढ़ने के कारण ग्राहकों का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है। सरकार ने बीते तेरह मई को सोने पर कस्टम ड्यूटी छह फीसदी से बढ़ाकर सीधे पंद्रह फीसदी कर दी थी। इसके बाद से ही निवेशक और आम उपभोक्ता नई खरीदारी करने की योजना लगातार टाल रहे हैं।

- Advertisement -

विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे स्तरों पर नया टैक्स लगने से कमर्शियल लागत बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंदी का माहौल होने से लोग अभी और इंतजार करना चाहते हैं। इसी वजह से प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद शादी-ब्याह के सीजन में भी कीमती धातुओं की रिटेल बिक्री में भारी गिरावट दर्ज हुई है।

मंदी के डर से पुराने आभूषणों की बिक्री में रिकॉर्ड तेजी

नए गहनों की सुस्त मांग के विपरीत घरेलू परिवारों द्वारा पुराना सोना बेचने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान देश में लगभग पचास टन पुराना सोना बाजार में रीसायकल होने आया है। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले पूरे पचास प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया है।

बाजार के जानकारों के मुताबिक कई लोग आर्थिक जरूरतें पूरी करने के लिए अपने पुराने आभूषण बेच रहे हैं। वहीं कुछ चतुर निवेशक मुनाफावसूली या बड़े नुकसान से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं। कई उपभोक्ता संकट के समय सीधे बेचने के बजाय गोल्ड लोन के विकल्प को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।

रिकॉर्ड ऊंचाई से तीस प्रतिशत तक लुढ़के सोने के दाम

इस साल उनतीस जनवरी को दस ग्राम सोने का भाव एक लाख अस्सी हजार रुपये के ऐतिहासिक शिखर पर था। वहां से लगातार गिरते हुए तीस जून को दाम एक लाख चालीस हजार रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गए हैं। इस प्रकार पांच महीनों में सोने में करीब तीस फीसदी का बड़ा क्रैश आया है।

चालू वित्त वर्ष की इस तिमाही में सोने की कीमतों में पंद्रह प्रतिशत की रिकॉर्ड गिरावट देखी गई है। साल 2013 के बाद यह सोने की कीमतों में आई सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है। इस तेज मंदी ने बड़े-बड़े बुलियन ट्रेडर्स और कमोडिटी मार्केट के निवेशकों को पूरी तरह हैरान कर दिया है।

वैश्विक कारणों से चार हजार डॉलर के नीचे आया भाव

ऑगमॉन्ट बुलियन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल मार्केट में सोना आठ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। मिडल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों से बाजार दबाव में है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातु की कीमतें लगातार चौथे महीने गिरावट के साथ बंद हुई हैं।

ग्लोबल एक्सचेंज पर सोना चार हजार डॉलर का महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तोड़कर अब 3,960 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह मंदी बरकरार रहती है, तो आने वाले दिनों में कीमतें 3,600 डॉलर तक गिर सकती हैं। हालांकि अत्यधिक बिकवाली के कारण शॉर्ट-टर्म में थोड़ी रिकवरी भी आ सकती है।

- Advertisement -

बड़ी खबरें

Topics

Related Articles