Business News: पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतों में एक बहुत ही तेज़ गिरावट दर्ज की गई है। इस भारी गिरावट के बाद अब आम निवेशकों के बीच यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या यह समय खरीदारी करने का एक अच्छा मौका है। साल की शुरुआत में एमसीएक्स (MCX) पर सोना 1,92,991 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड इंट्राडे स्तर तक पहुंच गया था।
अब सोना अपने ऑल टाइम हाई (All Time High) से लगभग 50,600 रुपये यानी 26% से भी ज़्यादा टूटकर करीब 1,42,413 रुपये के आसपास आ चुका है। यह बड़ी गिरावट ऐसे समय में देखने को मिली है जब वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतें अक्टूबर 2008 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट की तरफ बढ़ रही हैं।
अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और मजबूत डॉलर बने गिरावट की मुख्य वजह
रॉयटर्स के अनुसार, स्पॉट गोल्ड में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और यह जून के अंत तक लगभग 13% की मासिक गिरावट के साथ बंद होने की ओर है। यह लगातार चौथा महीना है जब सोना भारी दबाव में कारोबार कर रहा है। निवेशक सुरक्षित निवेश से हटकर अधिक रिटर्न वाले विकल्पों की ओर जा रहे हैं।
कमोडिटी विश्लेषकों के अनुसार, ऊंची महंगाई की उम्मीदें, बढ़ती ब्याज दरें और मजबूत डॉलर मिलकर उन सभी कारकों को दबा रहे हैं, जो आमतौर पर सोने की तेजी का समर्थन करते हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने का आकर्षण घट जाता है क्योंकि यह बॉन्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह कोई नियमित आय नहीं देता है।
अंतरराष्ट्रीय Peak से तीस फीसदी नीचे आया सोना और एक्सपर्ट्स की राय
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, सोना अब लगातार 4 हफ़्तों से गिर रहा है और जनवरी 2026 के अपने इंटरनेशनल पीक से लगभग 30% नीचे आ चुका है। हाल ही में हुए भू-राजनीतिक तनाव ने सेफ-हेवन एसेट्स की डिमांड को कुछ समय के लिए बढ़ाया था, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने ध्यान वापस इंटरेस्ट-रेट पर ला दिया है।
मार्केट एक्सपर्ट्स अब इस हफ़्ते आने वाली अमेरिकी आर्थिक रिपोर्टों पर करीब से नज़र रख रहे हैं, जो फेडरल रिजर्व के अगले पॉलिसी कदम को तय कर सकते हैं। जानकारों का मानना है कि अगर लेबर मार्केट का डेटा कमजोर होता है या महंगाई कम होती है, तो सोने की कीमतों में एक बार फिर सुधार देखने को मिल सकता है।
सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए धीरे-धीरे खरीदारी करने की सलाह
बाजार विश्लेषकों का सुझाव है कि भारी करेक्शन के बाद भी इन्वेस्टर्स को एक साथ बड़ी खरीदारी करने की जल्दबाजी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। बॉटम का समय जानने की कोशिश करने के बजाय, गोल्ड ईटीएफ (ETF), सॉवरेन बॉन्ड या डिजिटल गोल्ड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिए धीरे-धीरे निवेश करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
इससे शॉर्ट-टर्म वोलैटिलिटी (अस्थिरता) के असर को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। सोने का मीडियम-टर्म आउटलुक मुख्य रूप से तीन फैक्टर्स पर निर्भर करेगा: यूएस फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट-रेट के फैसले, यूएस डॉलर की मजबूती और वैश्विक स्तर पर होने वाले जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट।

