दक्षिण भारत के खिलाफ बड़ी साजिश? परिसीमन पर सीएम स्टालिन ने मोदी सरकार को दी कड़ी चेतावनी

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को सत्ता हथियाने की साजिश बताया है। स्टालिन ने कहा कि यह कदम कोई सुधार नहीं है। यह राजनीतिक सत्ता को मजबूत करने का खास प्रयास है। उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने का कड़ा विरोध किया। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि इससे दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान होगा। यह कदम देश के संघीय ढांचे को कमजोर कर देगा।

दक्षिण भारतीय राज्यों को मिलेगी सजा

मुख्यमंत्री स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि परिसीमन के नाम पर संसदीय सीटें बढ़ाना गलत है। यह सरकार के पूर्व घोषित नारों के बिल्कुल खिलाफ जाता है। स्टालिन ने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बहुत अच्छा काम किया है। अब नई नीति से इन राज्यों को अपने अच्छे काम की सजा मिलेगी। अधिक आबादी वाले उत्तरी राज्यों को इसका फायदा मिलेगा।

राजनीतिक संतुलन बिगड़ने का भारी खतरा

स्टालिन ने देश के राजनीतिक ढांचे पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उत्तरी राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बहुत बढ़ जाएगा। इससे संसद में दक्षिणी राज्यों की आवाज पूरी तरह दब जाएगी। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यह बदलाव भारत की संघीय संरचना को बर्बाद कर देगा। राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बुरी तरह बिगड़ जाएगा। सिर्फ सीटें बढ़ाने से देश के शासन में कोई बड़ा सुधार नहीं होने वाला है।

महिला आरक्षण पर सरकार को घेरा

मुख्यमंत्री ने विधानसभाओं में महिलाओं के लिए तैंतीस प्रतिशत आरक्षण का स्वागत किया है। लेकिन उन्होंने इसे परिसीमन से जोड़ने पर केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की है। स्टालिन ने इस जुड़ाव को पूरी तरह से राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम अभी बिल्कुल अनावश्यक है। सरकार को महिला आरक्षण मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर लागू करना चाहिए। इसमें किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।

ओबीसी और जातीय जनगणना की मांग

स्टालिन ने सामाजिक न्याय के मुद्दे पर भी अपनी राय स्पष्ट की है। उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व न मिलने पर चिंता जताई। मुख्यमंत्री ने देश में जाति आधारित जनगणना की पुरानी मांग फिर दोहराई है। उन्होंने कहा कि नीतियों की अनदेखी से समान प्रतिनिधित्व कमजोर होता है। आर्थिक प्रगति के बावजूद ओबीसी क्रीमी लेयर की आय सीमा नहीं बढ़ाई गई है। यह आज भी आठ लाख रुपए पर अटकी है।

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