दिल्ली में बिल्डर माफिया का खौफनाक जाल: नियमों को ताक पर रख खड़ी कीं 7 मंजिला इमारतें, मासूमों की जान दांव पर

Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में बिल्डर माफिया और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण का खेल धड़ल्ले से जारी है। करीब एक साल पहले दयालपुर में हुए भीषण इमारत हादसे के बाद एमसीडी ने ऊंची अवैध इमारतों को गिराने का बड़ा दावा किया था।

गरीबों की गाढ़ी कमाई पर डाका

प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद धरातल पर युद्ध स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है। इस ढुलमुल रवैए का सीधा फायदा बिल्डर माफिया उठा रहे हैं। वे मासूम और गरीब लोगों को अपने जाल में फंसाकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं।

लाचार लोग जैसे-तैसे अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी (15-20 लाख रुपये) जोड़कर इन अवैध फ्लैटों को खरीद रहे हैं। खरीदारों को बिल्कुल अंदाजा नहीं होता कि ये इमारतें पूरी तरह अवैध हैं। हादसा होने पर एमसीडी तोड़ने की बात तो करती है, लेकिन यह महज औपचारिकता बनकर रह जाती है।

नियमों को ताक पर रख हुआ निर्माण

दिल्ली के मौजूदा मास्टर प्लान के नियमों के मुताबिक यहां केवल 17.5 मीटर ऊंची (भूतल पार्किंग और चार मंजिल) इमारतों के निर्माण का ही कानूनी प्रविधान है। इसके उलट एमसीडी, पुलिस और बिल्डर माफिया के गठजोड़ से छह से सात मंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं।

शुक्रवार को तुगलकाबाद एक्सटेंशन में लगी भीषण आग में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद भी इलाके में अवैध निर्माण का काम धड़ल्ले से चल रहा है। यह पूरी घनी आबादी वाली कॉलोनी एमसीडी के मध्य जोन के अधिकार क्षेत्र में आती है।

अधिकारियों की नाक के नीचे खेल

इस जोन में अवैध निर्माण रोकने की वर्तमान जिम्मेदारी अधिशासी अभियंता एससी मीणा और विजय वर्मा की है। इसके बावजूद अधिकारियों की नाक के नीचे धड़ल्ले से निर्माण जारी है। इसी मध्य जोन के तहत आने वाले ऐतिहासिक दरियागंज इलाके की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

दरियागंज में बेहद पुरानी और जर्जर इमारतों के ऊपर ही पांच से छह मंजिला नए ऊंचे ढांचे खड़े किए जा रहे हैं। इन कमजोर और ओवरलोडेड इमारतों के गिरने से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने संकरी गलियों में चार-चार फीट बाहर तक छज्जे निकाल लिए हैं।

स्पेशल प्रोविजन एक्ट का उल्लंघन

कानूनी रूप से दिल्ली में 1 जून 2014 से पहले के निर्माण को केंद्र सरकार के ‘स्पेशल प्रोविजन एक्ट’ के तहत दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्राप्त है। नियमों के मुताबिक इस पुरानी तारीख के बाद अगर कोई भी नया निर्माण होता है, तो उसका कानूनी संरक्षण तुरंत समाप्त हो जाता है।

संरक्षण खत्म होने के बावजूद एमसीडी के जिम्मेदार अधिकारी इन नए अवैध निर्माणों पर कोई सख्त एक्शन नहीं ले रहे हैं। इस मध्य जोन में बिल्डर माफिया और भ्रष्टाचार के मामले पहले भी उजागर हो चुके हैं, जिसके कारण कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिर चुकी है।

बीते वर्ष ही तत्कालीन निगमायुक्त अश्वनी कुमार ने अवैध निर्माण पर समय रहते उचित कार्रवाई न करने के गंभीर आरोप में दो दोषी इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद भी भ्रष्ट तंत्र में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।

Author: Gaurav Malhotra

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories