Kabul News: अफगानिस्तान के हेरात शहर में महिलाओं पर थोपे गए सख्त ड्रेस कोड के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा है। इस दमनकारी नीति का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर तालिबान ने बेरहमी से बल प्रयोग किया। इस हिंसक कार्रवाई में एक मासूम लड़के समेत दो लोगों की मौत हो गई है।
तालिबानी सैनिकों की इस अंधाधुंध गोलीबारी और पिटाई में बीस से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कैद करना पूरी तरह गैरकानूनी और मानवाधिकारों का हनन है।
हेरात में महिलाओं की मनमानी गिरफ्तारी के बाद भड़का गुस्सा
विशेषज्ञों के मुताबिक यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 6 और 7 जून को तालिबान प्रशासन ने कई अफगान महिलाओं को हिरासत में लिया। उन पर नए ड्रेस कोड के उल्लंघन का आरोप था। इसके खिलाफ 9 जून को हेरात की जनता सड़कों पर उतर आई थी।
तालिबान के अधिकारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठियां भांजीं और सीधी गोलियां चलाईं। संयुक्त राष्ट्र के पैनल ने इस पूरे मामले की तुरंत निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कानून लागू करने के नाम पर इस तरह हिंसा फैलाना कतई जायज नहीं है।
विशेषज्ञों ने तालिबान को याद दिलाया कि उसे उन सभी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौतों का पालन करना चाहिए जिनका अफगानिस्तान हिस्सा रहा है। इसमें नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय अनुबंध, यातना के खिलाफ वैश्विक संधि और महिलाओं के खिलाफ होने वाले भेदभाव को रोकने वाले कानून शामिल हैं।
यूरोपीय संघ ने की तालिबानी दमन की कड़ी निंदा
ड्रेस कोड के नाम पर महिलाओं की इस मनमानी गिरफ्तारी को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव बढ़ने लगा है। यूरोपीय संघ (EU) ने हेरात में हुए इस अत्यधिक बल प्रयोग और तानाशाही रवैये की कड़ी निंदा की है। उन्होंने तालिबान से अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करने को कहा है।
यूरोपीय संघ के विदेश मामलों के मुख्य प्रवक्ता अनौअर अल अनौनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा की है। उन्होंने लिखा कि मौजूदा तालिबान प्रशासन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करना चाहिए। इस कठिन समय में यूरोपीय संघ पूरी तरह अफगान महिलाओं के साथ खड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुसार समानता, शांतिपूर्ण सभा, अभिव्यक्ति और आवाजाही की स्वतंत्रता जैसे बुनियादी अधिकार जनता का भरोसा बहाल करने के लिए बेहद जरूरी हैं। तालिबान के इन कठोर प्रतिबंधों और हिंसक रवैये के कारण अफगानिस्तान में हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं।
Author: Pallavi Sharma


