44 डिग्री की भीषण गर्मी में हांफ रहा है AC? 1 बाल्टी पानी से कमरे को बनाएं शिमला, बिजली बिल भी होगा आधा!

Lifestyle: भीषण गर्मी के दिनों में जब बाहर का तापमान 44 डिग्री के पार कर जाता है, तो अच्छे-अच्छे एसी भी हांफने लगते हैं। कमरा ठंडा होने का नाम नहीं लेता और बिजली का मीटर बुलेट ट्रेन की रफ्तार से भागता है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि उनके एसी में खराबी आ गई है।

असल में समस्या घर के अंदर नहीं, बल्कि बाहर धूप में तप रहे एसी के कंप्रेसर में होती है। सिर्फ एक बाल्टी पानी का सही इस्तेमाल आपके एसी को वापस सुपरफास्ट कूलिंग मोड में ला सकता है। इसके पीछे एक सीधा विज्ञान काम करता है, जो जेब और बिजली दोनों बचाता है।

जानिए आखिर भीषण गर्मी में क्यों घट जाती है एसी की क्षमता

आपका एसी कमरे के अंदर की गर्मी को खींचकर बाहर की हवा में छोड़ता है। जब दोपहर में बाहर का तापमान पहले से ही बहुत ज्यादा होता है, तो आउटडोर यूनिट के लिए अंदर की गर्मी को बाहर फेंकना बहुत मुश्किल हो जाता है। कंप्रेसर और गैस को बहुत मेहनत करनी पड़ती है।

इस वजह से एसी की काम करने की क्षमता अचानक घट जाती है। कूलिंग बहुत धीमी हो जाती है और बिजली की खपत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। असल में आपका एसी खराब नहीं होता है, वह बस बाहर के झुलसाने वाले मौसम की मार से बहुत परेशान रहता है।

कमाल करती है वाष्पीकरण की यह आसान वैज्ञानिक प्रक्रिया

जब आप आउटडोर यूनिट के कंडेनसर कॉइल्स पर पानी डालते हैं, तो वाष्पीकरण की प्रक्रिया शुरू होती है। जैसे पानी भाप बनकर उड़ता है, वह कॉइल्स की सतह से गर्मी को बहुत तेजी से सोख लेता है। यह ठीक वैसे ही काम करता है, जैसे शरीर से पसीना निकलने पर ठंडक मिलती है।

कॉइल्स का तापमान गिरते ही कंप्रेसर पर पड़ने वाला दबाव काफी कम हो जाता है। इसका सीधा नतीजा यह होता है कि कमरा तुरंत ठंडा होने लगता है। कंप्रेसर बहुत ही आसानी से अपना काम पूरा कर लेता है। यह आपके एसी के लिए एक इंस्टेंट एनर्जी बूस्टर है।

सूखी गर्मी वाले इन शहरों में सबसे ज्यादा असरदार है ट्रिक

यह तरीका सूखी गर्मी वाले शहरों जैसे दिल्ली, जयपुर, नागपुर और अहमदाबाद में सबसे बेहतरीन परिणाम देता है। मुंबई या चेन्नई जैसे अत्यधिक नमी वाले तटीय शहरों में हवा में पहले से बहुत पानी होता है। वहां वाष्पीकरण धीरे होने के कारण इसका फायदा थोड़ा कम मिलता है।

पानी डालने का सही और सुरक्षित तरीका, ताकि न हो नुकसान

एसी का आउटडोर यूनिट इस तरह बनाया जाता है कि वह बारिश का पानी आराम से झेल सके। पानी डालने से पहले मेन स्विच से एसी को पूरी तरह बंद कर दें। पानी के लिए बाल्टी या फिर गार्डन पाइप की हल्की फुहार का ही इस्तेमाल करें। बिजली के पैनल से पानी दूर रखें।

भूलकर भी प्रेशर वॉशर या जेट स्प्रे का उपयोग न करें। इसके तेज प्रेशर से एल्युमीनियम की पतली फिन्स मुड़ सकती हैं, जिससे एयरफ्लो ब्लॉक हो जाएगा। पानी को सिर्फ साइड की जाली और कॉइल्स पर ही डालें। पानी डालने के तीस मिनट बाद सतह सूखने पर ही एसी चालू करें।

बिजली के भारी-भरकम बिल में ऐसे होती है सीधी बड़ी बचत

जब कंप्रेसर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, तो वह लगातार चलता रहता है और कट-ऑफ नहीं होता। जून की गर्मी में जब एसी रोज कई घंटे चलता है, तो यही चीज बिजली का बिल आसमान पर पहुंचा देती है। पानी की मदद से कंप्रेसर अपना टारगेट जल्दी पूरा कर लेता है।

कंप्रेसर के जल्दी बंद होने का सीधा मतलब है बिजली की बहुत कम खपत। अगर आप गर्मी के मौसम में हर हफ्ते कॉइल्स को इस तरह साफ और ठंडा रखेंगे, तो आपके बिजली बिल में पंद्रह प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इससे धूल साफ होने से एसी की लाइफ बढ़ती है।

Karuna Sen

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